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चुनाव से पहले इस तरह किया जाएगा हजारों किसानों को खुश

किसानों को साधने के लिए इस पार्टी ने कर ली है पूरी तैयारी

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नीमच. पिछले साल मंदसौर जिले में किसानों पर चली गोली और 6 किसानों की हुई निर्मम मौत के बाद प्रमुख राजनीतिक दल अपनी अपनी रोटियां सेकने में लग गए हैं। एक राजनीतिक पार्टी ने किसानों को खुश करने के लिए तो ऐसी योजना बनाई है कि इससे हजारों किसान लाभांवित होंगे। यह भी हो सकता है कि किसान को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाने के लिए भी योजना बनाई जाए।

चुनाव साल में किसानों को साधने की होड़
इसी साल अक्टूबर माह के पहले पखवाड़े में नई अफीम नीति की घोषणा हो जाएगी। इस बार केंद्र सरकार अफीम काश्तकारों पर कुछ अधिक मेहरबान दिख रही है। ऐसे किसान को भी इस साल अफीम के पट्टे जारी किए जा सकते हैं जिनके पट्टे किन्हीं कारणों से वर्षों से रुके हुए हैं। एक नए फार्मूले के तहत भी अफीम काश्तकारों को उपकृत करने की योजना पर केंद्र सरकार कार्य कर रही है। दूसरी ओर मार्फिन प्रतिशत के आधार पर पट्टे जारी करने की नीति को लेकर किसान चिंतित है।

अफीक काश्तकारों के हित में हो सकती है नीति
चुनावी साल होने और इस साल अंत में विधानसभा होना है। किसानों को साधने में हर राजनीतिक दल पूरे जतन कर रहा है। किसान आंदोलन की आड़ में कांग्रेस किसानों की समस्या उठाकर उन्हें अपने पक्ष में करने का हर संभव प्रयास कर रही है। दूसरी ओर भाजपा किसानों के हित में नित नई नई योजनाएं लागू कर वोट बैंक को बिखरने से रोकने का प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में अफीम काश्तकारों को साधने का भी प्रयास किया जा रहा है। अक्टूबर माह में घोषित होने वाली नई अफीम नीति किसानों की उम्मीदों पर खरी उतर सकती है। किसानों को उनके रुके हुए पट्टे इस साल मिल सकते हैं। ऐसे किसानों की संख्या करीब एक हजार तक है। इतना ही नहीं वर्ष 1999 से 2003 के बीच जिन किसानों के पट्टे औसत पूरी नहीं कर पाने की वजह से कटे थे। ऐसे किसानों के लिए भी नई नीति में रियायत दी जा सकती है। इन पांच सालों में जिन किसानों के पट्टे कटे हैं उन्हें एक किलो औसत कम कर पट्टे जारी किए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर जिन किसानों को 54 किलो औसत देना थी, लेकिन उन्होंने 53 किलो दी है तो ऐसे किसान इन नई नीति के तहत पट्टे के हकदार माने जाएंगे।

ऐसे भी दिया जा सकता है किसानों को लाभ
नई अफीम नीति में जिन किसानों ने अफीम फसल वर्ष में औसत से कम अफीम नारकोटिक्स विभाग तो तुलवाई है उन किसानों के उस साल के पिछले पांच सालों को औसत निकाला जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि 5 सालों में से 3 साल किसान ने औसत से अधिक अफीम दी है तो उसे इस आधार पर कटा पट्टा वापस किया जा सकता है। वर्षों पहले जीरन क्षेत्र में अफीम काश्तकारों और नारकोटिक्स विभाग के बीच विवाद के बाद सैकड़ों किसानों के अफीम पट्टे काट दिए गए थे। इस साल ऐसे किसानों को भी पट्टे जारी किए जा सकते हैं।

इस कारण हो सकता है किसानों को नुकसान
पिछले साल घोषित मार्फिन प्रतिशत के आधार पर अफीम पट्टे की पात्रता निर्धारित की गई थी। तब इसका व्यापक विरोध हुआ था। इसके चलते इस नियम को सिथिल कर दिया गया था। लेकिन इस साल मार्फिन प्रतिशत 5.9 होने पर ही किसानों को पट्टे जारी करने की योजना है। बताया जा रहा है कि अबतक अफीम फैक्ट्री से किसानों को उनके द्वारा जमा कराई गई अफीम की रिपोर्ट नहीं मिल सकती है।

... तब कट जाएंगे 50 फीसदी पट्टे
5.9 प्रतिशत मार्फिन का अफीम में पाया जाना मौसम की अनुकूलता, भूमि की उर्वरक क्षमता, दवाईयों और फसल की वैरायटी पर निर्भर करती है। अधिकमत उत्पादन के लिए जो वैरायटी उपलब्ध है उसमें 5.9 प्रतिशत मार्फिन की मात्रा नहीं पाई जाती है। एक डेढ़ दशक पहले तीसा नंबर का अफीम बीज का उपयोग किया जाता था। तब औसत कम होती थी। आज जो लखपतिया बीज का अधिक उपयोग हो रहा है। इसमें मार्फिन की मात्रा कम और अफीम की औसत बढ़ जाती है। इस बीज का पोस्तादाना भी कम होता है। अफीम औसत अधिक होने की वजह से किसान इसका उपयोग करते हैं। पोस्तादाना कम जरूर होता है लेकिन क्वालिटी बेहतर रहने से दाम अच्छे मिल जाते हैं। मार्फिन प्रतिशत के आधार पर किसानों को अफीम के पट्टे दिए तो करीब 50 प्रतिशत तक पट्टे कट जाएंगे। इससे किसान नाराज भी होंगे।
- सुरेश शर्मा, ग्राम सावन अफीम काश्तकार

किसानों के हित में होगी अफीम नीति
नई अफीम नीति को लेकर करीब 15 से 20 बैठकें किसानों के साथ आयोजित की जा चुकी हैं। नई अफीम नीति किसानों के हित में ही होगी। वर्ष 1999 से 2003 तक रुके पट्टे किसानों दिए जाएंगे। जीरन क्षेत्र में जिन किसानों के पट्टे रोके गए थे उन्हें भी मिलेंगे। पट्टा कटने पर पिछले 5 साल का औसत निकालकर किसान को इसका लाभ दिया जाएगा।
- सुधीर गुप्ता, सांसद