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न्याय की पैरवी करने वाले नीमच डीपीओ के क्यों हुए गुलाबी हाथ पढ़ें

न्याय की पैरवी करने वाले नीमच डीपीओ के क्यों हुए गुलाबी हाथ पढ़ें

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न्याय की पैरवी करने वाले नीमच डीपीओ के क्यों हुए गुलाबी हाथ पढ़ें

न्याय की पैरवी करने वाले नीमच डीपीओ के क्यों हुए गुलाबी हाथ पढ़ें

नीमच। न्याय की पैरवी करने वाले जिला अभियोजन अधिकारी (डीपीओ) आरआर चौधरी को ही लोकायुक्त टीम ने भ्रष्टाचार के मामले की फाइल चलाने के मामले में दस हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ उनके कार्यालय से गिरफ्तार किया। जिसके बाद उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम विशेष न्यायालय में पेश किया गया। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह ठाकुर ने न्याय की पैरवी करने वाले को भ्रष्टाचार में पकड़ा जाना गंभीर अपराध मानते हुए उनकी जमानत अर्जी खारिज कर 4 सितंबर तक जेल भेजने के आदेश दिए हैं। जेल जाने के आदेश के बाद जैसे ही जेल पुलिस ने डीपीओ को गिरफ्त में लिया, उनकी तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द और धबराहट होने पर उन्हें जिला अस्पताल में लाया गया। डॉक्टर मनीष यादव ने चैकअप के दौरान बताय कि उनका बीपी हाई 180/110 था, ईसीजी भी कराई गई थी। जिसके चलते उन्हें कैदी वार्ड में भर्ती किया गया।

लोकायुक्त निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव ने बताया कि एमपीईबी कनिष्ठ यंत्री राजेंद्र गोलिया ने 18 अगस्त को शिकायत दी थी कि वर्ष 2015 में वह नयागांव विद्युत सब स्टेशन पर कनिष्ठ यंत्री के रूप में पदस्थ थे। इस दौरान सात हजार रुपए की रिश्वत के साथ लाइनमेन लालूराम शर्मा को गिरफ्तार किया था। जिसकी पूछताछ के बाद संदेहास्पद उन्हें और बाबू दीपक कुमार को भी आरोपी बनाकर तत्कालीन लोकायुक्त निरीक्षक कमल निगवाल ने कार्रवाई की थी। जो कि वर्तमान में जिला बालाघाट में पदस्थ है। दो साल से मामले में गवाह के बयान नहीं हो पा रहे है। लोकायुक्त निरीक्षक निगलवा के बयान के लिए कोर्ट ने उनकी उपस्थिति के लिए गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिए। लेकिन वह लंबे समय से कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे है। मामला भी आगे नहीं बढ़ रहा है। इस मामले की फाइल चलाने के एवज में जिला अभियोजन अधिकारी आरआर चौधरी ने 25 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की थी और निरीक्षक निंगवाल से भी बातचीत की थी। दोनों की मामले में मिलीभगत है। वह रिश्वत नहीं देना चाहता था। उसने 25 हजार की राशि अधिक बताई और 20 हजार रुपए में अभियोजन अधिकारी राजी हुआ। जिसकी शिकायत भोपाल लोकायुक्त एडीजी और उज्जैन लोकायुक्त एसपी को की थी।

पहली किश्त दस हजार देने आया
लोकायुक्त निरीक्षक श्रीवास्तव ने बताया कि १९ तारीख को वायस रिकॉर्डिंग कर ली गई थी। वहीं २१ तारीख की सुबह दस बजे टीम उज्जैन से शिकायतकर्ता को लेकर रवाना हुई। जिसे केमिकलयुक्त दस हजार रुपए भी सौंप दिए। फोन पर शिकायतकर्ता राजेंद्र ने जिला अभियोजन अधिकारी आरआर चौधरी से बातचीत की। करीब दोपहर डेढ बजे उन्होंने उनके कार्यालय कक्ष में बुलाया और रिश्वत के रुपए लिए। उसके बाद बाहर आकर शिकायतकर्ता का इशारा होने पर टीम कक्ष के भीतर घुस गई। वहीं आरोपी अधिकारी चौधरी के हाथ केमिकल के घोल में डलवाने पर पानी गुलाबी हो गया। वहीं जिला अभियोजन अधिकारी से रिश्वत की दस हजार रुपए की राशि भी जब्त कर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।