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Neemuch ऐसा हुआ तो गरीब की झोंपड़ी मकान में नहीं बदल पाएगी, यह रहेगी वजह

मध्यम वर्ग के लिए आशियाने का सपना पूरा करने होगा महंगा

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नीमच

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Mukesh Sharaiya

Jul 22, 2019

Neemuch Letest News In Hindi

 नई रेत नीति लागू होते ही छोटे रेत व्यापारियों के लिए खड़ा हो जाएगा संकट।

नीमच. सरकार गरीबों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन कई बार अनजाने में ही ऐसे निर्णय ले लिए जाते हैं जिनके परिणाम आगे चलकर सामने आते हैं। प्रदेश सरकार के एक ऐसे ही निर्णय का खामियाजा अब गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को भुगतना पड़ेगा। गरीब का झोंपड़ा न मकान बन पाएगा और न ही मध्यम वर्ग बड़े मकान के सपने को आसानी से पूरा कर सकेगा।

एक छोटी छत डलने जितनी मंगा सकेंगे रेत
नई रेत नीति लागू होने के बाद सबसे अधिक परेशानी मध्यम वर्ग के लोगों को आएगी। एक बार में रेत मंगवाने की सीमा तय हो जाएगी। नई रेत नीति में निजी निर्माण कार्य के लिए निर्माण स्थल पर रेत का भंडारण अधिकतम 20 घनमीटर किया जा सकता है। 20 घन मीटर यानी 700 फीट रेत जो एक डम्पर में होती है। एक डम्पर रेत से एक बार में छोटे घर की छत डाली जा सकती है। यदि आपका घर औसत 1500 से 2200 वर्ग फीट का है तो उसमें 40 घनमीट रेत की आवश्यकता पड़ेगी। नई रेत नीति लागू होने पर इतनी रेत आप एक बार में संग्रहित करके नहीं रख सकेंगे। इसका दुष्प्रभाव यह पड़ेगा कि आपको अपने मकान की छत दो टुकड़ों में भरवाना पड़ेगी। इससे छत निर्माण में समय भी अधिक लगेगा और जो छत एक बार में डल सकती है उसके टुकड़ों में डलवाने से मकान की मजबूत कमजोर होगी। खर्चा भी अधिक होगा।
छोटे व्यापारियों की टूट जाएगी कमर
नई रेत नीति से गरीब और मध्यम वर्ग के साथ छोटे व्यापारियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। जानकारों की माने तो नई रेत नीति मेें भंडारण क्षमता काफी बढ़ा दी गई है। छोटे व्यापारी इतनी अधिक मात्रा में न तो भंडारण कर सकेंगे और न ही रेत बेचने की प्रतिदिन की औसत बिक्री की कर सकेंगे। नई रेत नीति से छोटे व्यापारियों की कमर पूरी तरह टूट जाएगी। जानकार बताते हैं कि नई रेत नीति में भंडारण स्थल पर एक लाख घन मीटर यानी 35 लाख 31 हजार फीट रेत को तीन महीने के अंदर बेचना अनिवार्य होगा। इससे थोड़ा भी कम स्टॉक रहने पर उसे एक महीने के अंदर आवश्यक रूप से बेचना ही होगा। आशय यह है कि नई रेत नीति के मान से 208 डम्पर प्रतिदिन और महीने में छह हजार डम्पर रेत बेचना होगी। यदि व्यापारी ऐसा नहीं करेंगे तो रेत के भंडारण को सरकार राजसात कर लेंगी। नीमच जिले में इतनी बड़ी मात्रा में रेत बेच पाना मुमकिन ही नहीं है। न ही यहां इतने बड़े रेत कारोबारी हैं। यदि प्रशासन ने नई रेत नीति पर सख्ती की तो इससे छोटे रेत व्यापारियों का धंधा चौपट हो जाएगा।
राजस्थान के बनास नदी से आती है रेत
नई रेत नीति मध्यप्रदेश की नदियों से निकाली जाने वाली रेत के आधार पर बनाई गई है। जबकि नीमच जिले में भीलवाड़ा राजस्थान से रेत आती है। इसमें भी 90 फीसदी रेत अवैधानिक रूप से आती है। नई रेत नीति में रेत परिवहन पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। नई रेत नीति से भंडारण क्षमता काफी अधिक बढ़ाने से जिले में रेत का संकट खड़ा हो जाएगा। यहां के व्यापारी और 30 से 35 डम्पर ही प्रतिमाह मंगवाते हैं। जबकि नई नीति में 208 डम्पर प्रतिमाह अनिवार्य किया गया है। इसका बुरा प्रभाव जिले में आशियाना बनाने के सपने पर पड़ेगा। रेत काफी महंगी हो जाएगी। रेत का अवैध परिवहन भी काफी अधिक बढ़ जाएगा।
बदली जा रही है पूरी नीति
लगभग पूरी खनिज नीति की बदली जा रही है। अवैध परिवहन पर लगने वाली राशि भी काफी अधिक बढ़ जाएगी। स्टाक की क्षमता भी सीमित रहेगी। छोटे व्यापारियों को परेशानी हो सकती है। उम्मीद है एक माह में नीति स्वीकृत हो जाएगी।
- जेएस भिड़े, जिला खनिज अधिकारी