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यहां 15 साल से क्यों नहीं बनी रतनगढ़ की यह सड़क

यहां 15 साल से क्यों नहीं बनी रतनगढ़ की यह सड़क

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यहां 15 साल से क्यों नहीं बनी रतनगढ़ की यह सड़क

नीमच. कोई पिछले पंद्राह सालों से सड़क नहीं बनने के कारण परेशान है, तो कोई पक्की दुकान टूट जाने के कारण बेरोजगार हो गया है, किसी के सामने सिर छुपाने की समस्या आ गई थी, तो कोई पेयजल संकट के कारण परेशान है। यह हालात पत्रिका को जावद विधानसभा क्षेत्र में नजर आए। पत्रिका राह चलते अभियान के तहत रतनगढ़ से लेकर नई उमर तक करीब 10 किलोमीटर के क्षेत्र में निवासरत लोगों के हाल जानने चाहे, तो हर कोई एक के बाद एक समस्याओं का बखान करते हुए अपना आक्रोश व्यक्त करते नजर आए।

रतनगढ़ सब्जी बाजार में मंगलवार दोपहर करीब 12.30 बजे आमजन से उनके हाल जानने चाहे तो नारायणलाल चारण, सुरेशचंद्र राठौर, कुंदन सोनी, मनोज टेलर ने बताया कि नगर का सब्जी मंडी बाजार सबसे मुख्य बाजार है। यहां नगरवासी सब्जी से लेकर सोने चंादी और कपड़े तक खरीदने पहुंचते हैं। लेकिन आश्चर्य की बात है कि वर्ष 2003 के बाद से आज तक यहां की सड़क नहीं बनी, जबकि भाजपा का पिछले 15 सालों से एकछत्र राज रहा है। ऐसे में बारिश के दौरान सड़क पर गड्ढे होते हैं तो पेंचवर्क कर छोड़ दिया जाता है। इस कारण उड़ती धूल के कारण दुकानदार से लेकर रहवासी तक सभी प्रभावित है।

रतनगढ़ घाट के ऊपर कुल 40 पक्की दुकानें दुकानें थी, जिसमें कोई कृषि उपकरण, कोई ऑटो पार्टस, कोई किराना तो कोई चाय, पानी की होटल लगाकर अपना गुजर बसर कर रहा था। इसी दौरान प्रशासन ने उक्त स्थान को अतिक्रमण बताते हुए तोडऩे का नोटिस दिया, इस बारे में जब हमने विधायक को बताया तो उन्होंने कहा कि आप चिंता मत करो, मेरे होते हुए कोई भी एक ईंट तक नहीं हिला सकता। हम उनके भरोसे रह गए, इसी बीच अचानक 5 बजे प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर दुकानें तोडऩा शुरू कर दी, जिसमें दो ढ़ाई घंटे में सारी दुकानें जेसीबी की सहायता से तोड़ दी थी। यह बात राजू धाकड़, घीसालाल राठौर, घनश्याम गुर्जर, पप्पू धाकड़ आदि ने कही। वे टूटी हुई दुकानों के सामने खड़े होकर अपना आक्रोश विधायक के प्रति व्यक्त कर रहे थे।

घाटा की कुड़ी पर मंगलवार दोपहर 01.05 बजे लीला गाडोलिया, सोनू गाडोलिया, परवीन गाडोलिया, सागर, लखन गाडोलिया ने बताया कि हम दिनभर लोहा कूट कर चंद रुपए कमाते हैं। जैसे तैसे खून पसीना एक करके हमने ईंट की दीवारों पर छत डाली थी, ताकि बारिश के दिनों में परेशान न होना पड़े, लेकिन अचानक हमारा घर तोड़ दिया, जबकि रोड से काफी दूर निर्माण होने के कारण किसी को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं थी। जब से घर टूटा है हम सड़क पर आ गए हैं।


ग्राम नई उमर के ग्रामीणों ने चौपाल पर बैठकर बताया कि गांव में एक मात्र ट्यूबवेल होने के कारण ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है। अन्य कोई पेयजल स्रोत नहीं होने के कारण पूरा गांव ही इस पानी की टंकी पर निर्भर है। आश्चर्य की बात तो यह है कि स्कूल के बच्चे भी इसी टंकी पर पानी पीने आते हैं। ग्रामीण रामचंद्र धाकड़, गोपाल धाकड़, जितेंद्र आदिवासी, प्रेमशंकर धाकड़, जमनालाल प्रजापत ने बताया कि इस गांव में 60 से अधिक घर है।