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भौतिक सुखों को जो छोड़ता है वही सुख पाता है- आचार्यश्री विश्वरत्न सागर मसा

नीमच. जो संसार के भौतिक सुखों का त्याग करता है वही सच्चे सुख को प्राप्त करता है। जो व्यक्ति संसार के सुख भोगने के लिए आगे बढ़ता है वह दु:खी होता है और जो संसार के भौतिक सुखों को छोड़ता है वह सुखी होता है। भोग का मार्ग हमेशा दु:ख देता है। धर्म अध्यात्म हमेशा सच्चा सुख देता है।

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नीमच

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Mukesh Sharaiya

Mar 03, 2023

भौतिक सुखों को जो छोड़ता है वही सुख पाता है- आचार्यश्री विश्वरत्न सागर मसा

सभा स्थल पर आचार्यश्री विश्वरत्न सागर सुरीश्वर मसा से आशीर्वाद लेते हुए मुमुक्षु

यह बात आचार्यश्री विश्वरत्नसागर सुरीश्वर मसा ने कही। वे अष्टानिका महोत्सव की शृंखला में मिडिल स्कूल मैदान में गुरुवार सुबह आयोजित धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि महावीर ने त्याग के मार्ग को ही आत्म कल्याणकारी बताया है। रजो हरण लेने वाला और रजो हरण देने वाला दोनों ही महान होते हैं। रजो हरण प्रदान करते हुए दृश्य को देखना सबसे बड़ा सौभाग्य होता है। आचार्यश्री ने कहा कि आज समाज को सामाजिक सद्भावना और एकता की आवश्यकता है। राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने कहा कि संस्कृति की नींव पर संस्कारों की मंजिल बनती है संस्कारों से चरित्र का निर्माण होता है। धर्म आध्यात्मिक शक्ति से मानव जीवन का कल्याण होता है। अहिंसा से विश्व को शांति प्रदान की जा सकती है। विज्ञान पर अहिंसा से अंकुश लगाया जा सकता है और अहिंसा के अंकुश से ही विज्ञान के माध्यम से राष्ट्र का विकास हो सकता है। उत्तम रत्न सागर महाराज ने कहा कि दीक्षा से मन में प्रसन्नताआती है। यहां तो पूरा नीमच में सभी लोग बहुत प्रसन्न है। बच्चे क्या बुजुर्ग भी नृत्य कर रहे थे। हर व्यक्ति प्रसन्न था। जो धर्म अध्यात्म के रंग में रंग जाता है वह प्रसन्न रहता है। जो धर्म गुरु की मस्ती में मस्त हो जाता है उसकी जिंदगी में चार चांद लग जाते हैं और उसके हस्ती में भी चार चांद लग जाते हैं। आज दीक्षा के रंग में होली का रंग भी दिखाई दिया। राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने कहा कि मुमुक्षु अंजलि ने संसार के रंग को छोड़कर धर्म अध्यात्म के रंग को आत्मसात कर लिया है। अंजलि ने वर्षीदान के माध्यम से संसार के धन को लुटा दिया हैं। धर्म अध्यात्म के धन को ग्रहण कर लिया है। हमें मृत्यु को देखकर समझना चाहिए। अर्थी को देखकर भी हमें समझना चाहिए कि जिंदगी जीते हैं कपड़े बदल बदलकर अंत में हमें ले जाते हैं लोग कंधे बदल-बदल कर। मृत्यु शाश्वत सत्य है। इसे हमें समझना होगा। नाशवान शरीर को सजाने में लगे रहते हैं, जबकि हमारी आत्मा को परमार्थ के पुण्य कर्मों से सजाना चाहिए तभी हमारा कल्याण होगा। संसार की सभी माताएं अपनी बेटी को विश्व सुंदरी बनाना चाहती है, लेकिन ऐसा सोचना भी पाप होता है। संसार की सभी माता अपनी बेटी को ब्राह्मी सुंदर बनाएं तो उसकी आत्मा का कल्याण हो सकता है। धर्मसभा में उज्जवल रत्न सागर महाराज ने कहा कि संयम बिना आत्म कल्याण नहीं होता है। संयम है तो मोक्ष है। जीवन का कल्याण करना है तो मोक्ष मार्ग की ओर आगे कदम बढ़ाना चाहिए। अखे सिंह कोठारी ने मोक्ष दीक्षा पर आधारित एक गीत प्रस्तुत किया। भजन गायिका आदिती कोठारी इंदौर ने ऐसा जादू किया क्या गुरुवर हम हो गए दीवाने तुम्हारे लगे मुस्कान फूलों से प्यारी ... चाली रे चाली रे वेश श्रमण नों लेवाए जीवन भर जिन शासन की सेवा गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर स्वामी वात्सल्य के मुख्य धर्म लाभार्थी सोभगमल लोढ़ा परिवार का शाल श्रीफल मोती माला से सम्मान किया गया।