
नीमच कलेक्टर कार्यालय में हो रहा खुलकर भ्रष्टाचार
नीमच। कोरोना माहमारी में जहां हर व्यक्ति पीडि़त है, लेकिन भ्रष्टाचार के राक्षेस गरीबों का खून पीने से बाज नहीं आ रहे है। ऐसा ही एक वाक्य नीमच दसुंडी जागीर गांव के गरीब ने पीडि़त होकर लोकायुक्त की सहायता से भ्रष्ट एसडीएम के बाबू राजेश शर्मा को रिश्वत लेते रंगे हाथों शुक्रवार को गिरफ्तार करवाया है।
लोकायुक्त उज्जैन के निरीक्षक संतोष जमरा ने बताया कि नीमच के दसुंडी जागीर ग्राम निवासी शैलेंद्र सिंह शक्तावत ने पांच दिन पहले उज्जैन लोकायुक्त एसपी को शिकायत दी थी कि उसकी भूमि के डायर्वशन के लिए आवेदन फाइल एसडीएम कार्यालय लगी है। फाइल पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। एसडीएम कार्यालय में पदस्थ बाबू राजेश शर्मा दो माह से चक्कर कटवा रहा था। अब उससे १५ हजार रुपए रिश्वत की मांगी की है। तभी भूमि का डायर्वशन होगा। वह गरीब काश्तकार है और रिश्वत नहीं देना चाहता है। इस शिकायत का सत्यापन दो दिन पहले वायस रिकार्ड के साथ टीम ने किया और दस हजार तय पाई हुई। जिसके बाद लोकायुक्त की टीम ने ट्रेप की योजना बनाई। लोकायुक्त उज्जैन की टीम निरीक्षक संतोष जमरा, आरक्षक अनिल अटोलिया, शिवकुमार वर्मा, विशाल रेशमिया, इसरार खान की टीम उज्जैन से रवाना होकर शुक्रवार सुबह करीब 12 बजे पहुंची और आवेदक शैलेंद्र सिंह को दस हजार रुपए के नोट केमिकल लगे दिए। जिसके बाद शैलेंद्र ने बाबू राजेश शर्मा को फोन किया और उन्होंने उसे ऑफिस बुलाया। जहां पर दस हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों सहायक ग्रेड ३ बाबू राजेश शर्मा को टीम ने दबोच लिया और उससे दस हजार रुपए निश्वत के नोट बरामद कर कार्रवाई की। जिसके बाद ऑफिस में हडकंप मच गया।
जिला कलेक्टर कार्यालय में हो रहा है खुलकर भ्रष्टाचार
आपको बता दे कि लोकायुक्त निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव ने एक अगस्त को रिश्वत लेते हुए एडीएम के रीडर को पांच हजार रुपए की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया था। 29 जुलाई 2019 को चीताखेड़ा निवासी राकेश परमार ने शिकायत की थी और बताया कि गांव के शासकीय अध्यापक अजय पिता बालमुकुंद शर्मा ने शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर रखा था। उसे दूसरे को बेच भी दिया। इसकी शिकायत सबसे पहले तहसील कोर्ट में की तो वहां से उनके पक्ष में फैसला हुआ फि र अपील होने पर एसडीएम कोर्ट में सुनवाई चली। वहां से भी तहसील का आदेश यथावत रखा। उसके बाद एडीएम कोर्ट में प्रकरण आया था। जहां मामले को राकेश के पक्ष में करने के लिए एडीएम के रीडर कमलेश गुप्ता ने उनसे 5 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। इसकी शिकायत उन्होंने लोकायुक्त उज्जैन को कर दी। इसके बाद लोकायुक्त ने बाबू पर नजर रखी और उसकी वाइस को रिकॉर्ड किया। मामले की पुष्टि होने के बाद 1 अगस्त को दोपहर में लंच के समय रिश्वत के रुपए कलेक्टर कार्यालय के बाहर होटल पर देने की बात तय हुई। प्रार्थी राकेश कमलेश को होटल पर लेकर आए और वहां उसे रिश्वत के 5 हजार रुपए दिए। इसी दौरान पूर्व सूचना पर वहां आकर छिपी बैठी लोकायुक्त टीम ने रीडर को रिश्वत के केमिकलयुक्त 500-500 के 10 नोट के साथ पकड़ लिया था।
Published on:
20 Sept 2020 12:43 pm
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