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सीपीएस पद्धति के तहत बढ सकते है अफीम काश्तकारी के पट्टे

-नई अफीम नीति में 2 हजार मैट्रिक टन डोडों के उत्पादन का लक्ष्य- अफीम नीति 2022-23 निर्धारण की कवायद शुरू- पत्रिका बिग इश्यू

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सीपीएस पद्धति के तहत बढ सकते है अफीम काश्तकारी के पट्टे

सीपीएस पद्धति के तहत बढ सकते है अफीम काश्तकारी के पट्टे

नीमच। अफीम उत्पादन फसल वर्ष 2022-23 के लिए नई अफीम नीति निर्धारण की प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो गई है, वहीं नीति का प्रारूप तैयार कर लिया गया है, जिसे केंद्रीय वित्त मंत्री की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत भी किया जा चुका है। प्रारूप पर मुहर लगी तो नई अफीम नीति 27 सितंबर तक घोषित होने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा प्रति वर्ष नई अफीम नीति घोषित की जाती है, जिसे देश के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश में लागू किया जाता है। जिसके अनुरूप अफीम पट्टे वितरित होते है। इसी के चलते प्रति वर्ष अफीम काश्तकारों को नई अफीम नीति का काफी बेसब्री से इंतेजार रहता है। नई अफीम नीति निर्धारण की प्रक्रिया के अंतर्गत अपुभ्म उत्पादक राज्यों के नारकोटिक्स मुख्यालयों पर सलाहकार समिति की बैठकों के बाद ६ सितंबर 2022 को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक भी सम्पन्न हो चुकी है। सभी बैठकों में प्रमुख किसानों और अफीम उत्पादक क्षेत्रों के सांसदों की ओर से पिछले साल से शुरू सीपीएस पद्धति के तहत काश्त को अनुपयुक्त करार देते हुए इस बार परम्परागत पद्धति को ही बढ़ावा देने की मांग भी प्रबल रूप से की गई है। लेकिन जानकारों का कहना है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारत के अलावा दुनिया के सभी देशों में अपनाई जाने वाली सीपीएस पद्धति को बढ़ावा देने को उचित मानती है। इस दिशा में आगे बढऩे का मन भी बना चुकी है। इसी पर आगे का कार्य किया जा रहा है। पिछले वर्ष ही उनके निर्देश पर देश में पहली बार सीपीएस पद्धति के तहत डोडों पर चीरा नहीं लगाने की शर्ता पर करीब 10 हजार किसानों को लायसेंस देने का ठोस निर्णय विरोध के बावजूद लिया गया था। किसानों से डोडा संग्रहण तक की प्रक्रिया निर्विध्र सम्पन्न होने से इस दिशा में आगे बढऩे का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।

500 टन की मात्रा बढ़ाने की गुजाइंश
जानकारों की माने तो सरकार ने प्रायवेट सेक्टर को प्रति वर्ष 500 टन डोडो से सीधे अफीम निकालने की प्रक्रिया के अंतर्गत सेमी रिफाइन मार्फिन बनाकर सरकारी प्लांट को देने के लिए पांच वर्षीय अनुबंध को निष्पादित किया है। जिससे साफ हो गया है कि आने वाले समय में सीपीएस पद्धति के अनुसार पट्टे का वितरण अधिक होगा। पिछले साल दस हजार किसानो ंसे कोई 412 मेट्रिक टन डोडा प्राप्त हुआ है। अनुबंध में ५०० टन की मात्रा को बढ़ाने की गुजाइंश भी रखी गई है। सरकार ने फसल वर्ष 2022-23 में सीपीएस पद्धति के तहत बिना चीरा लगे दो हजार मेट्रिक टन डोडो के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इससे साफ है कि सरकार सीपीएस पद्धति के तहत उत्पादन बढ़ाने की और अग्रसर है।

सीपीएस पद्धति के दोगुना बटेंगे पट्टे
जानकारों की माने तो नई अफीम नीति में सीपीएस पद्धति के अनुरूप काश्त के तहत उत्पादन का रकबा और इसके अंतर्गत लायसेंसधारी सिाकनों की संख्या पिछले साल की तुलना में दो गुना से भी अधिक होने की पूरी संभावना है। ज्ञातव्य है कि पिछले साल पात्र 10 हजार किसानों को ६-६ आरी के ही लायसेंस दिए गए थे । इस बार उन सभी किसानों के अलावा नए नियमों के तहत पात्र किसान को समान रूप से 10-10 आराी के लिए लायसेंस देने की संभावना दिख रही है। जानकारों की माने तो प्रशासनिक स्तर पर नई अपुीम नीति का प्रारूप तय किया जा चुका है और केंद्रीय वित्त मंत्री की मंजूरी की प्रक्रिया में है। पूरी संभावना है कि २५ सितंबर के दौरान नई अफीम नीति में परम्परागत खेती का क्षेत्र और लायसेंस बढ़ाने की मांग और दबाव सांसदो की ओर से बहुत अधिक रहा है। लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्री इस में कुछ बदलाव कर सकती है।

इनका यह कहना है
सीपीएस पद्धति के तहत काश्तकारी में किसानों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। प्रत्येक किसान की लागत भी नहीं निकलती है। अफीम काश्तकार को दस आरी की खेती में 60 हजार खर्च आता है और सरकार से उसे 12 हजार रुपए मिलते है। सीपीएस पद्धति के तहत डोडे में छेद कर जो पोस्तादाना निकाला जाता है। वह काला दाना होता है। जिसे किसान बाजार में लेकर आता है तो उसमें मार्फिन होने के चलते नारकोटिक्स कार्रवाई करती है। इसी का नतीजा है कि पिछले दो माह से नीमच में पोस्तादाना मंडी बंद है। अगर ऐसा रहा तो धीरे-धीर अफीम काश्तकार खत्म हो जाएंगे।
- योगेंद्र जोशी, महासचिव अफीम काश्तकार संगठन नीमच, मंदसौर, जावरा।