
चांदी के सिंहासन पर बैठी ये माता दूर करती है कई रोग, रोज आते है यहां हजारों लोग
नीमच. मालवा की वैष्णोदेवी के रूप में प्रसिद्ध मां भादवामाता के दरबार में आज से 9 दिवसीय नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो गई है, माता चांदी के सिंहासन पर विराजी है, जहां आपको दर्शन करने पर माता के 9 रुप नजर आते हैं, माता की महिमा निराली है, वे अपने यहां आनेवाले लोगों के रोगों को तो दूर करती ही हैं साथ ही उनकी मनोकामना भी पूरी होती है, यही कारण है कि माता के दरबार में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
मध्यप्रदेश के नीमच जिले में विराजी मां भादवामाता मालवा की वैष्णोदेवी के नाम से पहचानी जाती है। यहां माता के दर्शन करने लिए श्रद्धालु देश सहित विदेश से भी पहुंचते हैं। क्योंकि यहां का पानी अमृत माना जाता है, जिससे लकवे और चर्म रोगियों को काफी फायदा होता है। वैसे तो सालभर ही भक्त माता के दर्शन करने आते हैं। लेकिन नवरात्रि में श्रद्धालुaओं की संख्या हजारों की तादात में रहती है।
अमृत कुंड के पानी का महत्व
भादवामाता में मंदिर के समीप ही अमृत कुंड के नाम से एक कुंड है, इसी कुंड का पानी अमृत माना जाता है, कहते हैं यहां के पानी का उपयोग चर्म रोग व लकवे से पीडि़त लोग करते हैं, तो उन्हें काफी फायदा होता है, यही कारण है कि माता के दरबार में हजारों की संख्या में श्रद्धालु आरोग्य की इच्छा लेकर आते हैं। जिससे उन्हें फायदा भी पहुंचता है, खास बात तो यह है कि यह पानी भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है, जिसे नित्य लगाने या नहाने से दिनों दिनों चर्म रोग और लकवे की समस्या से निजात मिलने लगती है।
ऐसे पहुंचे भादवामाता
भादवामाता पहुंचने के लिए मध्यप्रदेश में सबसे सबसे पहले नीमच पहुंचना होता है, यहां बस और ट्रेन दोनों के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। वहीं फ्लाईट से आने वालों के लिए मध्यप्रदेश में इंदौर और राजस्थान में उदयपुर पहुंचना होता है। फिर इन स्थानों से नीमच व्हाया बस, ट्रेन या टेक्सी से पहुंचना है, नीमच पहुंचने के बाद आपको भादवामाता गांव जाना होता है, जो नीमच जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां बस, ऑटो रिक्शा या टेक्सी के माध्यम से जाया जा सकता है।
नि:शुल्क होते हैं दर्शन
भादवामाता में आनेवाले श्रद्धालुओं के लिए कोई स्पेशल कतार नहीं होती है, यहां महिला एवं पुरूष की दो कतार रहती है, ऐसे में यहां दर्शन करने के लिए किसी प्रकार का कोई पैसा नहीं देना पड़ता है, केवल अपनी अपनी कतार में खड़े होना रहता है। यहां दर्शन करने में भी अधिक समय नहीं लगता है। क्योंकि मंदिर प्रांगण काफी बड़ा है, ऐसे में कुछ ही देर में हजारों श्रद्धालु दर्शन कर लेते हैं।
Published on:
22 Mar 2023 09:37 am
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