नीमच। शहर में बंगला बगीचा की समस्या हल होने का नाम नहीं ले रही है, वहीं लोग प्रोपर्टी डीलरों को औने-पौने दाम में देकर इससे पल्ला झाड़ रहे है। वहीं कानून दांव पेच में माहिर प्रोपर्टी डीलर नियमों का माखोल उड़ाकर वहां पर अवैध रूप से निर्माण कर रहे है। ऐसा ही एक मामला बगीचा नंबर ३५ बी डॉक्टर अंबेडकर कॉलोनी का सामने आया है। जिसकी शिकायत कलेक्टर व सीएमओ को दी गई।
अंबेडकर कॉलोनी पुलिया पार करते ही यादव समाज के मंदिर के पास बगीचे की करीब ५० हजार वर्गफीट से अधिक जमीन पर अवैध रूप से बिना व्यवस्थापन के कॉलोनी का निर्माण किया जा रहा है। जिसके लिए वहां पर क्रॉस रोड का निर्माण भी कॉलोनाइजर ने कराया है। पत्रिका ने जब इसकी पड़ताल की तो पूर्व में इस जमीन पर मदन मछली वाले का कब्जा था। उसके बाद उसने यह जमीन शब्बीर बोहरा को बेची। जो कि कॉलोनी काट रहा है। जब पत्रिका ने उससे जानकारी मांगी तो उसका कहना है कि उसने यह जमीन फिरोज नाम के व्यक्ति को बेच दी। वहीं इस पर कॉलोनी काट रहा है। आपको बता दें कि बगीचे की जमीन पर शासन का अधिकार है। बिना व्यवस्थापन व रजिस्ट्री के कोई कॉलोनी नहीं काट सकता है, लेकिन वहां पर अवैध रूप से कॉलोनी का निर्माण किया जा रहा है।
समस्या निराकरण के लिए व्यवस्थापन बोर्ड का गठन
बंगला-बगीचा क्षेत्र में 50 वर्षों से काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के प्रस्ताव पर नपा के विशेष सम्मेलन बुलाकर मुहर लगाई थी। समस्या निराकरण के लिए व्यवस्थापन बोर्ड का गठन होने पर 20 दिसंबर 2017 से सुनवाई शुरू हुई। बोर्ड अध्यक्ष एसडीएम डॉ. ममता खेड़े बंगला-बगीचा की समस्या को हल करना शुरू किया है। लेकिन ५ हजार वर्गफीट से अधिक का व्यवस्थापन नहीं हो सकता है। उसके बाद भी अवैध तरीके से ५ से १० हजार वर्गफीट पर कॉलोनाइजर अवैध रूप से कॉलोनी का निर्माण कर रहें हैं। जबकि टीएनसीपी से भी अनुमति नहीं ली गई है तो निर्माण कैसे शुरू हो सकता है।
पांच हजार वर्गफीट जमीन ही मिल पाएगी
बंगला बगीचा समस्या के निदान में शासन ने पांच हजार वर्गफीट तक की जमीन को छूट दी है। इससे अधिक जमीन नगरपालिका के खाते में दर्ज होगी। 5000 वर्गफीट तक की जमीन के विस्थापन के लिए घोषित किया गया है। इसके लिए प्रीमियम व लीजरेंट तय की है। 5000 वर्गफीट से अधिक जमीन के लिए 100प्रतिशत प्रीमियम वर्तमान गाइड लाइन जमा करवाना होगी। सुनवाई के बाद जिन प्रकरणों का निराकरण होगा उन आवेदकों को शासन द्वारा तय शुल्क जमा करवाना होगा। इसमें प्रीमियम राशि, लीज रेंट, निर्माण शुल्क और विकास शुल्क लगाया गया है। जो तीन किस्तों में जमा करवाया जा सकेगा। पहली किस्त 25 फीसदी, दूसरी 40 और तीसरी किस्त 35 फीसदी राशि देना होगी। एक मुश्त जमा कराने पर पांच फीसदी की छूट दी जाएगी। कुछ मामलों में लोगों के पास रुपए न होने की परेशानी भी सामने आई है। रुपया जमा नहीं होने की दशा में प्रकरण बोर्ड के पास ही अटक गए हैं ।
ये है बंगला-बगीचा क्षेत्र में निवास करने वालों की समस्या
सन 1978 में तत्कालीन नीमच एसडीएम ने बंगला-बगीचा क्षेत्र की भूमि के स्वामित्व पर सवाल खड़े किए। इसके पीछे तर्क था पूर्व में नीमच अंग्रेजों की छावनी हुआ करता था। अंग्रेजों के 60 बंगले, 54 बगीचे व लगभग इतने ही खेत थे। आजादी के बाद वे इन्हें अन्य लोगों को सौंपकर चले गए। इन लोगों के पास भूमि के स्वामित्व और अधिकार से संबंधित दस्तावेज नहीं है। बंगला-बगीचा का असाधारण राजपत्र क्रमांक-239 भोपाल में 26 मई 2017 को प्रकाशित किया गया हैं। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद मसौदे को नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा फाइनल कर विधिविधान विभाग से अंतिम राय लेने के बाद राज्यपाल के पास भेजा था। राजपत्र में नपा नीमच सीमा अंतर्गत छावनी क्षेत्र स्थित भूमि व्यवस्थापन नियम, 2017 नाम दिया गया है। इस नियम का विस्तार संपूर्ण छावनी क्षेत्र है। जिला प्रशासन को व्यवस्थापन बोर्ड का गठन किया। इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष ने सुनवाई शुरू की।
निर्माण फर्म को नोटिस जारी किया है
बगीचा नंबर ३५ बी डॉ. अंबेडकर कॉलोनी पुलिया के समीप की जमीन नगरपालिका की है। जिस पर अवैध रूप से कॉलोनी निर्माण की सूचना मिली थी। इस पर कॉलोनाइजर को नोटिस देकर जवाब तलब किया है और कार्य रोकने के आदेश दिए है। वहीं कॉलोनाइजर द्वारा कुछ कागजात भी प्रस्तुत किए गए थे। लेकिन यह अन्न उपजाऊ जमीन है। इस पर नगर पालिका का अधिग्रहण है। इसके लिए जाहिर सूचना भी जारी की गई है कि कोई भी व्यक्ति यहां पर खरीद फरोख्त न करें।
– गरिमा पाटीदार, सीएमओ नगरपालिका नीमच।