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Viedo News… दलहन का रकबा बढ़ाया अवश्य, नहीं दिखी किसानों में रुचि

इस साल भी सोयाबीन का रकबा जिले में सर्वाधिक

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नीमच

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Mukesh Sharaiya

Jun 10, 2023

नीमच. जमीन की उर्वरक क्षमता बनाए रखने के लिए कृषि विभाग की ओर से किसानों को फसल चक्र का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। सोयाबीन की लगातार बोवनी करने से जमीन की उर्वरक क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसके विकल्प के रूप में विभाग की ओर से किसानों को दलहन की अधिक बोवनी का सुझाव दिया जाता है। पिछले साल भी दलहन कर रकबा बढ़ाया गया था, लेकिन मौसम प्रतिकूल होने से तिलहन की ही अधिक बोवनी हुई। इस साल खरीफ का जिले में एक लाख 76 हजार 340 हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जो पिछले साल हुई बोवनी से 540 हेक्टेयर कम है। पिछले साल जिले में एक लाख 76 हजार 880 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बोवनी हुई थी।

जिले में खरीफ का रकबा (हेक्टेयर में)
फसल गत वर्ष बोवनी इस वर्ष लक्ष्य
धान २०० २००
मक्का १३८०० २००००
ज्वार ४० १००
बाजरा ५० १००
उदड़ ८०० ४५००
मूंग २० ५०
अरहर १० २०
तिल १० ५०
मूंगफली ५८९० १६३००
सोयाबीन १५६०५० १३५०००
कपास १० २०

दलहन की तुलना में तिलहन का रकबा अधिक
कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार नीमच जिले में अनाज और दलहन की तलुना में तिलहन की सर्वाधिक बोवनी होती है। पिछले साल जिले में अनाज १४ हजार ९० हेक्टेयर में बोया गया था। इस साल २० हजार ४०० हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। वहीं पिछले साल जिले में दलहन ८३० हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई थी। इस साल रकबा बढ़ाकर ४५७० हेक्टेयर किया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि कृषि विभाग स्वयं दलहन बोवनी के प्रति किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है, लेकिन किसान इस ओर आकर्षित ही नहीं हो रहे हैं। आंकड़ों से यह बात प्रमाणित भी होती है। वर्ष २०२१ में जिले में २७०० हेक्टेयर में दलहन की खेती हुई थी। वर्ष २०२२ में यह रकबा घटकर ८३० हेक्टेयर रह गया था। इस साल फिर से किसानों को दलहन के प्रति जागरूक करने के लिए रकबा बढ़ाया गया है। इस साल प्रस्तावित रकबा ३ हजार ७४० बढ़ाया गया है। जिले में पिछले साल तिलहन की एक लाख ६१ हजार ९५० हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी हुई थी। इस साल यह रकबा घटाकर एक लाख ५१ हजार ३५० किया गया है। पिछले दो सालों के आंकड़ों पर ही नजर डाले तो सोयाबीन की बोवनी का क्षेत्रफल बढ़ा ही है। वर्ष २०२१ में जिले में एक लाख ३४ हजार ४७० हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी की गई थी। पिछले साल वर्ष २०२२ में यह बढ़कर एक लाख ५६ हजार ५० हेक्टेयर हो गई थी। ऐसे में इस बात भी पूरी संभावना है कि कृषि विभाग की ओर से प्रस्तावित बोवनी के लक्ष्य से सोयाबीन का रकबा कम होने की बजाय बढ़ेगा ही। जिले में वर्ष २०२१ में खरीफ फसल की एक लाख ६६ हजार ८०० हेक्टेयर में बोवनी हुई थी। पिछले साल एक लाख ७६ हजा ८८० हेक्टेयर में बोवनी हुई थी। वहीं इस साल एक लाख ७६ हजार ३४० हेक्टेयर में खरीफ बोवनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिले में ८१ फीसदी खाद का भंडारण
कृषि विभाग से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नीमच जिले में मांग अनुसार वर्तमान में ८१.३६ फीसदी खाद उपलब्ध है। विभाग की ओर से जिले में ७ हजार ६६८ मेट्रिक टन यूरिया का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसकी तुलना में ५ हजार ३४४.७९ मेट्रिक टन यूरिया का भंडारण मौजूद है। इसी प्रकार डीएपी का लक्ष्य ३ हजार ६०३ रखा गया है। वर्तमान में ३ हजार ५९८.९० मेट्रिक टन डीएपी का भंडार है। एनपीके का लक्ष्य ४ हजार ३४ मेट्रिक टन रखा गया था। इसकी तुलना में ४०३२.३५ मेट्रिक टन का भंडारण है। एमओपी २१४ मेट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया था इसमें से १७४.१ मेट्रिक टन का भंडारण उपलब्ध है।
अत्यधिक वर्षा से प्रभावित हुई थी दलहन बोवनी
पिछले साल अत्यधिक बारिश होने से किसानों ने दलहन की बजाय तिलहन पर अधिक विश्वास किया। अधिक बारिश होने की वजह से उड़द की फसल पर सबसे अधिक प्रतिकूल असर पर पड़ा था। मौसम को देखते हुए भी किसानों ने अपना मानस बदल लिया था। विभाग की ओर से किसानों को दलहन की ओर अधिक प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को फसल च्रक के तहत सोयाबीन का विकल्प तलाशना चाहिए। लगातार सोयाबीन की बोवनी करने से जमीन की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है।
– एनसी पाटीदार, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी