
नानीबाई का मायरा कथा सुनाते पंडित गोविंद उपाध्याय।
नीमच. नानीबाई का मायरा ज्ञान है विज्ञान है भक्ति है कर्म है कर्म सिखाता है व्यक्ति को किस प्रकार से भक्ति कर्म करना चाहिए वह नानी बाई का मायरा से प्रेरणा मिलती है। यदि नरसिंह मेहता जैसा चरित्र चाहिए तो नानी बाई का मायरा रूपी सरोवर में जाना होगा।
भक्ति में ईश्वर दौड़े चले आते हैं जब परमात्मा को याद किया जाता है
यह बात पंडित गोविंद उपाध्याय ने कही। वे नया बाजार परिवार उत्सव समिति द्वारा आयोजित नानीबाई के मायरे कथा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भक्त नरसीजी के नानीबाई का मायरा भरने स्वयं परमात्मा सांवरिया सेठ अपने परिवार के सहित आते हैं। भक्ति में ईश्वर दौड़े चले आते हैं जब परमात्मा को याद किया जाता है वे दया करते हैं याद का उल्टा शब्द दया है। भक्ति से ईश्वर चले आते हैं नरसी मेहता के पास में मायरा भरने की व्यवस्था नहीं थी अनन्य भाव से परमात्मा को याद किया उन्होंने दया की और नानी बाई का 56 करोड़ का मायरा भरा। भूल करना मनुष्य का स्वभाव है तो भूल को सुधारना भी मनुष्य का स्वभाव होना चाहिए। नानीबाई के मायरा कथा में श्रीनरसिंह मंदिर से बैंड बाजों एवं ढोल नगाड़ों के साथ भगवान सांवरिया सेठ की दिव्य झांकी एवं मूर्ति के साथ अग्रवाल सोमेश्वर महिला मंडल एवं नया बाजार परिवार उत्सव समिति के सदस्य एवं अंचल के नागरिक गण मायरा लेकर पहुंचे। नगर के प्रमुख मार्गों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। भगवान की दिव्य मूर्ति को अपने मस्तक के ऊपर रखने की होड़ मची। बैल गाडिय़ों में सोने की ईंट, माहेरे की सामग्री एवं महिलाएं व पुरुष हाथों में मायरे की सामग्री लेकर बड़े बालाजी नया बाजार कथा स्थल पर श्री सांवरिया सेठ पहुंचे। जहां पंडित उपाध्याय के मुख से सभी ने कथा का श्रवण किया। महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। नानी बाई के मायरे कथा में अपार जनसैलाब सम्मिलित हुआ। श्रीबड़े बालाजी मंदिर से 21 मई को सांवरिया सेठ यात्रा में भागवताचार्य पंडित गोविंद उपाध्याय सहित भक्तगण सांवरिया सेठ के दर्शन करने पहुंचे।
Published on:
24 May 2022 01:51 am
बड़ी खबरें
View Allनीमच
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
