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शत्रुंजय तप के 51 तपस्वियों का निकला शाही बग्गी में वरघोड़ा

शत्रुंजय तप के 51 तपस्वियों का निकला शाही बग्गी में वरघोड़ा

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शत्रुंजय तप के 51 तपस्वियों का निकला शाही बग्गी में वरघोड़ा

नीमच. शत्रुंजय तप की तपस्या करने वाले करीब 51 जैन तपस्वियों का रविवार को शाही बग्गी में भव्य वरघोड़ा निकला, शहर के जिस मार्ग से यह वरघोड़ा निकला, वहां जैन समाजजनों ने बहुमान कर तपस्या की अनुमोदना की, भव्य वरघोड़ा पुस्तक बाजार स्थित जैन श्वेतांबर भीड़ भंजन पाश्र्वनाथ मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ माहेश्वरी भवन पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हुआ।


चातुर्मास के दौरान साध्वी मुक्तिप्रिया, मृदुप्रिया, हर्षप्रिया, ऋजुप्रिया, जिन प्रिया आदि ठाणा सात के सानिध्य में रविवार को शत्रुंजय तप की तपस्या करने वाले जैन समाजजनों का भव्य वरघोड़ा निकला, वरघोड़े में प्रभु रथ, मंगल कलश शिरोधार्य किए श्राविकाएं, घोड़े पर सवार नन्नें मुन्ने बच्चे, दो युवा समाजजन स्वर्ण ध्वजा हाथ में लिए चलायमान थे, वहीं करीब १३ शाही बग्गियों में करीब 51 तपस्वियों का वरघोड़ा कतारबद्ध तरीके से निकला । इस दौरान नपा की रेलीगाड़ी में नन्नें मुन्नें बच्चों ने नगर भ्रमण का आनंद लिया।


वरघोड़ा माहेश्वरी भवन में पहुंचने के बाद धर्मसभा में परिवर्तित हुआ, जहां तपस्वियों का बहुमान बेग, श्रीफल और मोतियों की माला के साथ किया गया। इस अवसर पर धर्मसभा को साध्वियों ने संबोधित कर जैन समाजजनों को तपस्या के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर साध्वी मुक्तिप्रिया श्रीजी मसा ने कहा कि इच्छा का त्याग करना ही तप होता है। त्याग तपस्या का उद्देश्य आहार संज्ञा को तोडऩा होता है। मनुष्य जीवन में मानव इच्छाओं का अंत नहीं होता है, इसलिए तपस्या से इच्छाओं पर नियंत्रण किया जा सकता है। इस अवसर पर ट्रस्ट अध्यक्ष अनिल नागौरी, सचिव मनीष कोठारी, प्रेमप्रकाश जैन, अखेसिंह कोठारी, माणकलाल सोनी आदि उपस्थित रहे। वहीं सालोनी सकलेचा, पंकज धींग ने भजन प्रस्तुत किए। इसी के साथ धार्मिक चढ़ावे की बोलिया लगाई, जिसमें समाजजनों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।