नीमच. महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत परियोजना अधिकारी पर्यवेक्षक व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
ज्ञात हो कि महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी एवं पर्यवेक्षक तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका विगत 30 वर्षों से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्षरत है। मांगों को लेकर कई बार लिखित ज्ञापन भी दिए गए। कई बार धरना प्रदर्शन भी किया गया, लेकिन शासन द्वारा लगातार उपेक्षा कि गई। मांगों का समाधान नहीं किया गया। इसको लेकर महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत परियोजना अधिकारी पर्यवेक्षक व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल रहे हैं। गुरुवार को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की हड़ताल का ९वां दिन था। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के द्वारा गांधी वाटिका में धरना प्रदर्शन कर ढोलक व मजीरे बजाकर लोक गीत गाकर अपना विरोध जताया। आंगनवाड़ी सहायिका और कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगे नियमितीकरण किया जाना। सहायिका को 21 हजार और कार्यकर्ता को 26 हजार वेतन दिया जाना चाहिए। विरोध प्रदर्शन में तरन्नुम खान, प्रीति गोयल, ललिता मेहता, कलावती कणिक, कुसुम अंब, शशि जयसवाल, निर्मला मोदी, कृष्णा सोलंकी, तारा मकवाना, किरण उपाध्याय, वीणा पथरोड़ सहित जिलेभर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाएं मोजूद रहीं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की हड़ताल के चलते जिले में लगभग एक हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताले लटके रहें। वहीं सीडीपीओ व सुपरवाइजर भी सामूहिक रूप से हड़ताल होने के कारण शासन की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इसमें खासकर लाड़ली बहन योजना में लाभ दिलाने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी अहम रखी गई थी। इसके अतिरिक्त पोषण आहार, टीकाकरण सहित शासन की अन्य योजनाएं जो आम नागरिकों से जुड़ी है प्रभावित हो रही हैं।