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नीमच में शिक्षा के मंदिर में मैडम के सेल्फी शौक ने बिगाड़ा माहौल

स्कूलों का लिया औचक जायजा, कहीं नदारद तो कहीं मोबाइल में व्यस्त मिले शिक्षक, ‘शिक्षा के मंदिर’ को सोशल मीडिया पर ‘टीआरपी’ बढ़ाने का माध्यम बनाया शिक्षिकाओं ने, सोशल मीडिया पर जनगणना कार्य का भी मजाक बनाते शिक्षिका वीडियो हुआ वायरल
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नीमच

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Mukesh Sharaiya

Jul 07, 2026

Neemuch Breaking News

कक्षा में विद्यार्थी उपस्थित शिक्षक नदारद।

नीमच. शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण की प्रक्रिया है। ऐसे में यदि कोई शिक्षक स्वयं ही विद्यालय परिसर, शासकीय कार्य या जनगणना महत्वपूर्ण दायित्वों के दौरान टीआरपी बढ़ाते सोशल मीडिया पर वायरल होने का प्रयास कर रहे हैं। इन दिनों इस तरह के शिक्षिकाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसकी पड़ताल करते हुए सरकारी स्कूलों का औचक जायजा लिया गया। कहीं शिक्षक मिले भी लेकिन बच्चों को पढ़ाने के बजाय मोबाइल पर व्यक्त नजर आए। कहीं कक्षा में विद्यार्थी मौजूद थे, लेकिन कुर्सी से शिक्षक गायब मिले।

कक्षा से नदारद शिक्षक, कुछ मोबाइल में दिखे व्यक्त
धनेरियाकला स्थित शासकीय विद्यालय की एक शिक्षिका का विद्यालय परिसर में बनाई गई रील वायरल होने के बाद सोमवार को शहर के विभिन्न शासकीय विद्यालयों का जायजा लिया गया। कई स्थानों पर शिक्षक अनुपस्थित मिले तो कहीं शिक्षक मोबाइल फोन में व्यस्त दिखाई दिए। बच्चे बिना मार्गदर्शन के अपनी-अपनी कक्षाओं में बैठे दिखे, लेकिन कक्ष में शिक्षक नहीं मिले। शिक्षक समाज में आदर्श माने जाते हैं। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है। ऐसे में यदि वही शिक्षक विद्यालय परिसर अथवा शासकीय कार्य के दौरान रील बनाने को प्राथमिकता दें तो यह स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है।

स्कूल में दिखाई दी अव्यवस्था
सोमवार को शहर के विभिन्न शासकीय विद्यालयों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 में कक्षा सातवीं और आठवीं की शिक्षिकाएं कक्षा से गायब मिलीं। कक्षाओं में बच्चे स्वयं ही एक-दूसरे का होमवर्क जांचते और आपस में चर्चा करते दिखाई दिए। इसी प्रकार शासकीय प्राथमिक विद्यालय अयोध्या बस्ती में भी कक्षा पांचवीं के शिक्षक अनुपस्थित मिले। हालांकि इस विद्यालय में भवन में रंगाई का कार्य चल रहा है और अन्य मूलभूत सुविधाओं की समस्याएं भी सामने आईं। इसकी शिकायत विद्यालय प्रबंधन द्वारा विभाग को पूर्व में की जा चुकी है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका है। कुछ विद्यालयों में शिक्षक उपस्थित तो मिले, लेकिन वे विद्यार्थियों को पढ़ाने के बजाय मोबाइल में व्यस्त नजर आए। ऐसे दृश्य शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करते हैं।

सोशल मीडिया पर शिक्षकों की सक्रियता
पिछले कुछ समय से जिले में कई शिक्षकों द्वारा विद्यालय परिसर, सडक़ों पर तथा जनगणना सहित अन्य शासकीय कार्यों के दौरान फिल्मी गीतों पर रील बनाकर इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए जाने के मामले सामने आए हैं। विदित हो कि हाल ही में शिक्षक संगठन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सडक़ों पर उतरे थे। पात्रता परीक्षा से राहत, सेवा अवधि की गणना नियुक्ति तिथि से किए जाने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने सहित अन्य मांगों को लेकर शिक्षकों ने प्रदर्शन, ज्ञापन और आंदोलन किए। उच्च न्यायालय के निर्णय को लेकर भी कई स्थानों पर विरोध दर्ज कराया गया था। उस समय शिक्षकों ने अपने अधिकारों, सम्मान और गरिमा की बात प्रमुखता से उठाई थी। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि जब अधिकारों और सम्मान की बात की जाती है, तो क्या उसी के समान दायित्व, अनुशासन और विद्यार्थियों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी का पालन भी उतनी ही गंभीरता से नहीं होना चाहिए।

इनका कहना है
जिला शिक्षा अधिकारी ऐश्वर्या मूंदड़ा का कहना था कि शिक्षक एक गरिमामय पद है। विद्यालय शिक्षा एवं संस्कार देने का स्थान है। विद्यालय परिसर अथवा शासकीय कार्य के दौरान रील बनाने के वायरल मामले को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित शिक्षिका के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं निरीक्षण में अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों की जानकारी भी प्राप्त की जा रही है। तथ्य सही पाए जाने पर आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।