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Video News… जीव दया बिना नहीं हो सकता आत्मा का कल्याण

यह बात विजयमुनिमसा ने कही।

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नीमच

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Mukesh Sharaiya

Jul 30, 2023

नीमच. धरती पर रहने वाले सभी जीवों को जीवन जीने का अधिकार है। महावीर स्वामी ने जियो और जीने दो का अधिकार सभी को बताया है। सभी जीवों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। सभी प्राणियों के प्राणों की रक्षा के लिए महावीर स्वामी ने अनेक उपसर्ग और कष्टों को सहन किया इसीलिए वे महावीर कहलाए। जीव दया बिना आत्मा का कल्याण नहीं होता है।

यह बात विजयमुनिमसा ने कही। वे श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी श्रावक संघ के तत्वावधान में गांधी वाटिका के सामने जैन दिवाकर भवन में आयोजित चातुर्मास धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि दिवाकर संप्रदाय के महान जैन संत चौथमल मसा ने वर्षों पूर्व बड़ी सादड़ी के समीप भीमगढ़ क्षेत्र में अपनी जिनवाणी के माध्यम से क्षत्रिय भीम सिंह को जीव दया की प्रेरणा दी। हिंसा से शिकार करने को पाप बताया था तब भीमसिंह ने उदयपुर महाराणा फतेहसिंह को भी शिकार करने के लिए मना कर दिया था। जीव दया की प्रेरणा का संदेश दिया था। तब उदयपुर दरबार फतेहसिंह ने भीमसिंह को सम्मानित कर जीव दया का संकल्प लिया था। जब बिना इच्छा के जिनवाणी के अमृत वचन सुनने से भी जीवन का कल्याण हो सकता है तो जो लोग इच्छा से जिनवाणी सुन रहे हैं उनका कल्याण होना तय होता है। जिनवाणी सुनने के बाद जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आना चाहिए नहीं तो जिनवाणी श्रवण करना व्यर्थ हो जाता है। संतों की वाणी श्रवण करने से पाप कर्मों का नाश होता है इसीलिए संसार में रहते हुए साधु संत और गुरु का संदेश का महत्व आदर्श प्रेरणादाई होता है। धर्मसभा में चंद्रेश मुनि महाराज साहब ने कहा कि परमात्मा का सानिध्य प्राप्त कर मनुष्य व्यसन मुक्त हो जाता है। चोर चोरी की वृत्ति को छोड़ देता है। जैन तीर्थंकर की वाणी श्रवण कर पापी भी अपने पाप से मुक्त होकर जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन कर सकता है। साधारण मनुष्य संस्कारों से अपने जीवन में जीव दया का पालन कर सकता है और अपनी आत्मा का कल्याण कर सकता है। साध्वी डॉ. विजय सुमनश्रीजी ने कहा कि गुरु बड़े उपकारी होते हैं। उनके मार्गदर्शन से जीवन का कल्याण हो सकता है। चतुर्विद संघ की उपस्थिति में चतुर्मास काल तपस्या साधना निरंतर प्रवाहित हो रही है। धर्मसभा में उपप्रवर्तक चन्द्रेशमुनि मसा एवं साध्वी विजयश्रीजी का सानिध्य मिला। इस अवसर पर अभिजीतमुनि मसा, अरिहंतमुनिमसा, ठाणा 4 व अरिहंत आराधिका तपस्विनी विजयाश्रीजी आदि ठाणा का सानिध्य मिला। चातुर्मासिक मंगल धर्मसभा में सैकड़ों समाजजनों ने बड़ी संख्या में उत्साह के साथ भाग लिया। धर्मसभा का संचालन प्रवक्त भंवरलाल देशलहरा ने किया।