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मोबाइल और लेपटॉप में चल रहे एप से खेला जा रहा ऑनलाइन सट्टा

मोबाइल और लेपटॉप में चल रहे एप से खेला जा रहा ऑनलाइन सट्टा

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मोबाइल और लेपटॉप में चल रहे एप से खेला जा रहा ऑनलाइन सट्टा

नीमच। देश भर में वल्र्डकप क्रिकेट की धूम के साथ सटोरिए भी सक्रिय हो गए। नीमच शहर में ही 30-35 बुकी सक्रिय होकर किक्रेट सट्टा खाईवाली धड़ल्ले से कर रहे हैं। पुलिस ने आईपीएल मैच में तो कुछ क्रिकेट बुकी को गिरफ्तार किया था, लेकिन वल्र्डकप में पुलिस की सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। जिसके चलते बैखोफ होकर सटोरिए सट्टा कर रहे हैं। तकनीक ने मैदान के अंदर ही नहीं बल्कि मैदान के बाहर होने वाले खेल को भी बदल दिया है। अलग-अलग मोबाइल ऐप्स ने सटोरियों को एक ऐसी जगह उपलब्ध करा दी है, जहां ना उन्हें अपनी पहचान जाहिर होने का डर है और ना पुलिस का खौफ। परंपरागत सट्टे के सिंगल शॉट, जोड़ी या फि र मटका अब तमाम वेबसाइट और ऐप पर खुलेआम खेला जा रहा है। इनमें पड़ोसी मुल्कों या यूरोपीय देशों के सर्वर का इस्तेमाल होता है, ऐसे में जड़ तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

पुलिस की मानें तो सटोरिये एक मोबाइल फ ोन पर 4-5 ई.वॉलेट रखते हैं। इन ऐप पर 4 तरह की मेंबरशिप होती हैं। पहली लाइव गेम की जर्नल मेंबरशिप। वहींए एक दिन की वीआईपी सदस्यता की कीमत 20 हजार रुपये है। एक हफ्ते की वीवीआईपी मेंबरशिप चाहिए तो 50 हजार से लेकर एक लाख तक देने होंगे। एक महीने की सुपर वीवीआईपी मेंबरशिप 2 से 3 लाख रुपये तक में मिलती है। सट्टा कारोबारियों के पंटर सबसे महंगी मेंबरशिप के साथ घाटा रिकवर करने वाली इंश्योरेंस स्कीमों के भी ऑफ र देते हैं।

सट्टा किंग ही खोल सकता है किसी नए सटोरिये का खाता
साइबर एक्सपर्ट और जानकारों के अनुसार ऐसे किसी ऐप से जुडऩे के लिए सट्टा किंग की शरण में जाना पड़ता है। छोटे सटोरिये को ई-वॉलेट के जरिये गारंटी मनी देनी पड़ती है। इसके बाद उसके नाम पर एक अकाउंट खुलता है। इसका पासवर्ड दिया जाता है। फिर उसे मिलते हैं मैच के भाव और मिनट टू मिनट अपडेट। सट्टेबाजी होती है और सारा लेन-देन ई-वॉलेट के माध्यम से ही किया जाता है।

भारत में रुपया, विदेशी साइट पर चल रहा बिटकॉइन
भारत में सट्टे का ऑनलाइन कारोबार रुपये में हो रहा है जबकि विदेशी साइटें बिटकॉइन में डील करती हैं। जिस ई-वॉलेट से लेन-देन होता हैए उसे क्लाइंट की डिजिटल आईडी के साथ ही रजिस्टर कर लिया जाता है। दूसरे मोबाइल नंबर और ई.वॉलेट का इस्तेमाल नहीं होता।

वॉट्सऐप छोड़कर नई तकनीक अपनाईए पुलिस हो गई पीछे
पहले सट्टेबाज वॉट्सऐप का उपयोग करते थेए लेकिन ग्रुप में सीमित लोग ही शामिल हो पाने की वजह से इस प्लैटफ ॉर्म को बदला गया। लोकल सटोरियों को पकड़कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना पुलिस के लिए जितना आसान है,, ऑनलाइन सट्टेबाजों, साइट और मोबाइल ऐप कंपनियों के खिलाफ ऐक्शन उतना ही मुश्किल। जिस तेजी से सट्टे में इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा हैए उस रफ्तार से पुलिस के पास जांच करने की तकनीक नहीं आई। ऐसे में वह पीछे रह जाती है।

पकडऩा काफी मुश्किल
विदेशों में सर्वर होने और ऐप के कारण सट्टे को ट्रेस कर पाना मुश्किल है। पहले होटलों के कमरों या घरों में बैठकर दांव लगाने वाले अधिकतर लोग ऑनलाइन हो गए हैं। अधिकतर मेसेजिंग ऐप का यूज कर रहे हैं। लेकिन पुलिस सक्रिय है, जल्द ही साइबर सेल की मदद से क्रि केट सटोरियों को पकड़ा जाएगा।
- राकेश मोहन शुक्ल, सीएसपी नीमच