
शासकीय आयोजन में हुआ सिंगल युज प्लास्टिक का जमकर उपयोग,शासकीय आयोजन में हुआ सिंगल युज प्लास्टिक का जमकर उपयोग,महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने नहीं भरा 8 दिन में यह फार्म तो लगेगा 2 हजार तक का फटका
नीमच. वर्ष 2019 जिलेवासियों के लिए कई खुशियां और सौगात लेकर पूर्ण हुआ। अब जिलेवासियों को 2020 से कई उम्मीदें हैं। क्योंकि इस साल नगर सरकार बदलेगी, जिससे विकास की कई गाथाएं लिखी जाएगी। इस बार जिले के हजारों विद्यार्थियों को दर्जनों प्रोफेसरों की सौगात मिली है। लेकिन चिकित्सकों की कमी से आज भी जिला जूझ रहा है।
विद्यार्थियों को मिली प्रोफेसरों की सौगात
जिले के अधिकतर महाविद्यालयों को वर्ष 2019 के अंतिम दौर में सहायक प्राध्यापकों की सौगात मिली है। जिससे महाविद्यालयों में प्राध्यापकों की कमी करीब 98 प्रतिशत तक कम हुई है। क्योंकि विभिन्न विषयों के सहायक प्राध्यापकों ने ज्वाईन कर लिया है। जिसमें नीमच पीजी कॉलेज में 24, मनासा कॉलेज में 11, सिंगोली में 2, सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 6 और रामपुरा कॉलेज में 14 सहायक प्राध्यापक आए हैं।
10 चिकित्सकों के बावजूद मरीज होते हैं परेशान
जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ करने के लिए करीब 10 चिकित्सकों ने ज्वाईन किया है। लेकिन आश्चर्य की बात है इसके बावजूद भी मरीजों को भटकना पड़ता है, क्योंकि आज भी जिले के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित ट्रामा सेंटर और जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी है। इस बारे में जिम्मेदारों ने आला अधिकारियों को भी पत्र लिखे हैं। लेकिन चिकित्सक की कमी दूर नहीं हो रही है।
शहरवासियों मिला भरपूर पेयजल, इस साल नहीं आएगा संकट
वर्ष 2019 में जोरदार बारिश होने से जाजू सागर बांध लबालब हो गया है। जिससे निश्चित ही शहरवासियों को वर्ष 2020 में भर गर्मी में भी पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस बार जब जाजू सागर बांध से जमकर पानी बह निकला, तो आसपास के क्षेत्रवासियों द्वारा जमकर इस अवसर का लुत्फ उठाया गया।
बस स्टैंड का अधूरा निर्माण, यात्री होते हैं परेशान
शहर के प्रायवेट बस स्टैंड पर विशाल यात्री प्रतिक्षालय का निर्माण होना है। जिसके चलते शुरूआत में तो युद्ध स्तर पर काम चला, लेकिन बाद में निर्माण की कछुआ चाल के कारण प्रतिक्षालय अभी तक मूर्त रूप नहीं ले सका है। ऐसे में जिलेभर सहित दूर दराज से आवाजाही करने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्योंकि बसों का इंतजार करते समय उन्हें सिर छुपाने की जगह भी नहीं नसीब होती है।
Published on:
01 Jan 2020 12:45 pm
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