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शिक्षा विभाग की मनमानी पर जड़ा ताला

खबर का असर ४ बच्चों पर २ शिक्षकों के स्कूल पर जडऩा पड़ा ताला

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इस स्कूल में ४ बच्चों पर पदस्थ थे दो नियमित शिक्षाकर्मी। लम्बी जद्दोजहद के बाद आखिर इस स्कूल पर भी ताले लग गए।


नीमच. सीएम हेल्पलाइन हो या कलेक्टर जहां भी निपानिया स्कूल में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर आवाज उठाई गई उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मनमानी पर आमादा दिखे। नवागत कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लिया। परिणाम सार्थक आए। मजबूरी में ही सही ४ बच्चों पर पदस्थ दो शिक्षकों के स्कूल पर अंतत: ताले जड़ दिए गए।
पिछले करीब ५ सालों तक गिनती के बच्चों पर दो शिक्षक पदस्थ रहे। दिनभर अखबार पढऩे और गैरशैक्षणिक कार्य कर अपना समय व्यतीत कर रहे थे। '२४ बच्चों का स्कूल बंद, चार बच्चों के स्कूल पर मेहरबानीÓ शीर्षक से २४ जून के अंक में पत्रिका में खबर प्रकाशित हुई थी। रेवली देवली पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम निपानिया में पिछले ५ सालों से नाममात्र बच्चों पर दो नियमित शिक्षक पदस्थ थे। इसकी जानकारी नवागत कलेक्टर राकेशकुमार श्रीवास्तव को भी दी गई थी। उन्होंने इसे गंभीरता से लिया था। इसी का परिणाम रहा कि जिला शिक्षा अधिकारी के आशीर्वाद से नियम विरूद्ध वर्षों से संचालित इस स्कूल पर भी मजबूरी में ही सही ताले जडऩा पड़े। पत्रिका ने अपनी खबर में जिक्र किया था कि जहां एक ओर जिला शिक्षा अधिकारी नियमों का हवाला देते हुए २४ बच्चों के स्कूल को बंद कर रहे हैं वहीं दूसरी और मात्र ४ बच्चों पर दो शिक्षक पदस्थ होने पर भी उसको लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है। इतना ही नहीं इस स्कूल संचालन में बरती जा रही अनियमितताओं को लेकर ग्रामीण चेनसिंह सोलंकी ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत भी दर्ज कराई थी। लेकिन इस शिकायत पर भी शिक्षा विभाग गंभीर नहीं हुआ था। पत्रिका में प्रमुखता से खबर प्रकाशित करने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल बंद करने का निर्णय लिया। यहां पदस्थ शिक्षक ओमप्रकाश मेघवाल को जवासा और शंभुलाल मेघवाल को रातडिय़ा प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ किया गया है।
५ साल से पदस्थ है गिनती के बच्चों पर दो शिक्षक
विदित हो कि शिक्षा विभाग के आला अधिकार सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायतों को भी हल्के में ले रहे थे या उन्हें इस बात का गुमान हो गया है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आशीर्वाद है तो फिर डरने की क्या बात है। शायद ऐसा ही कुछ जिले में देखने को मिल रहा है। सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण में जिला शिक्षा विभाग मनमानी पर आमादा थे। यहां तक कि रेवली देवली पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम निपानिया में पिछले करीब ५ सालों से गिनती के बच्चों पर दो नियमित शिक्षक पदस्थ थे। कई बार इस अनियमितता की ओर जिला शिक्षा अधिकारी केसी शर्मा का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई वैधानिक निर्णय नहीं लिया गया जा रहा था। जब पत्रिका ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की तो स्कूल बंद करने का निर्णय लेना ही पड़ा।