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राज्यों को चुनावी खर्च पुनर्भरण बजट में 90 फीसदी की कटौती

- मांगे 3079 करोड़ और मिले मात्र 292 करोड़, संसदीय समिति ने भी जताई हैरानी

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राज्यों को चुनावी खर्च पुनर्भरण बजट में 90 फीसदी की कटौती

राज्यों को चुनावी खर्च पुनर्भरण बजट में 90 फीसदी की कटौती

सुरेश व्यास
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने चुनावों के लिए राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को दी जाने वाली पुनर्भरण राशि के बजट पर भंयकर रूप से कैंची चलाई है। विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने वित्त मंत्रालय के लिए साल 2023-24 के लिए इस मद में 3079.05 करोड़ रुपए मांगे थे, लेकिन वित्त मंत्रालय ने आम बजट में इसके मुकाबले महज 292 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। राज्य इस राशि का इस्तेमाल चुनाव की तैयारियों, मतदाता सूचियों के प्रकाशन व फोटोयुक्त मतदाता कार्ड आदि बनाने में करते हैं।

राज्यसभा की कार्मिक, जनअभियोग तथा विधि व न्याय मंत्रालय से सम्बन्धित स्थाई संसदीय समिति इस मद में भारी भरकम कटौती से हैरान रह गई। भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने विभाग की अनुदान मांगों पर संसद के दोनों सदनों में पेश अपने 130वें प्रतिवेदन में कहा कि समिति को हालांकि इतनी भारी-भरकम कटौती के कारण पता नहीं है, लेकिन लगता है कि जरूरी फंड के गलत अनुमान के कारण यह कटौती हुई है और यह विभाग व चुनाव आयोग की विफलता है।

समिति ने इस बात पर भी हैरानी जताई है कि चुनाव पुनर्भरण मद के अलावा विभाग के कुल बजट अनुमान 5036.40 करोड़ पर भी 55.30 प्रतिशत की कैंची चलाते हुए 2251.29 करोड़ रुपए ही मंजूर किए गए हैं। यह आंकड़ा भी हैरत में डालने वाला रहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में विभाग को संशोधित अनुमानों के तहत आवंटित 1876.75 करोड़ के बजट में से गत 31 जनवरी तक 562.25 करोड़ रुपए यानी 30 प्रतिशत ही खर्च हो सके।

विभागीय अधिकारियों ने समिति के सामने कहा कि राज्यों के चुनावी खातों का निस्तारण सम्बन्धित राज्य के महा लेखा परीक्षक के ऑडिट सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही होता है और आमतौर पर यह प्रमाण पत्र केंद्र तक पहुंचने में दो से तीन साल लग जाते हैं। साल 2022-23 में केंद्र को सिर्फ सात राज्यों को ऐसे प्रमाण पत्र मिले हैं। समिति ने विभागीय अधिकारियों को बजट का समान रूप से समग्र इस्तेमाल करने की हिदायत दी है।

ईवीएम के लिए सर्वाधिक राशि

समिति की रिपोर्ट के अनुसार इस बार नई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) खरीदने के लिए लगभग 25 फीसदी वृद्धि के साथ सर्वाधिक 1866.78 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग को अगले साल होने वाले आम चुनाव के लिए नई ईवीएम खरीदनी है। पिछले बजट में ईवीएम खरीद के लिए 1500 करोड़ रुपए रखे गए थे। इसमें से आयोग गत 10 फरवरी तक मात्र 208.72 करोड़ रुपए ही खर्च सका और 630.99 करोड़ के बिलों को अभी मंत्रालय से मंजूरी मिलनी है।

सेमिकंडक्टर ने अटकाई खरीद

चुनाव आयोग ने समिति को बताया कि दुनिया भर में सेमिकंडक्टर की कमी के कारण पर्याप्त मात्रा में ईवीएम की खरीद नहीं हो पाई। इसके बिना ईवीएम व वीवीपेट मशीनें नहीं बनाई जा सकती। कोविड व लॉकडाउन के चलते वैश्विक बाजार ने सेमिकंडक्टर्स की कमी झेली है, लेकिन अब हालात सुधर रहे हैं। इसके मद्देनजर आयोग ने उम्मीद जताई है कि वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले आवंटित राशि का इस्तेमाल हो जाएगा।