
आधार कार्ड आवेदन ने 16 बिछड़े लोगों को परिवार से मिलाया
नागपुर. आपने सोशल मीडिया के जरिए बिछड़े-लापता लोगों के परिवार से मिलने के बारे में सुना होगा। अब आधार कार्ड भी पुनर्मिलन का जरिया बन गया है। मामला महाराष्ट्र की दूसरी राजधानी नागपुर का है, जहां आधार कार्ड के आवेदनों ने 16 लापता लोगों को उनके परिवारों से मिलाया। जो लोग वर्षों बाद अपने परिवार से मिले हैं, उनमें बच्चे, बुजुर्ग और विकलांग शामिल हैं। इनमें से कुछ लोगों ने 10 साल से अपने परिवार वालों को नहीं देखा था। इन लोगों ने आधार कार्ड के लिए कई बार आवेदन किए थे। हर बार उनके आवेदन खारिज हो जाते थे। आखिरकार नागपुर के आधार सेवा केंद्र (एएसके) के अधिकारियों को इन लोगों की बॉयोमैट्रिक जानकारी पहले से आधार कार्ड सिस्टम से लिंक होने की आशंका हुई। मनकापुर आधार सेवा केंद्र के मैनेजर ऑनरेरी कैप्टन अनिल मराठे ने मुंबई के क्षेत्रीय आधार केंद्र और बेंगलूरु के प्रौद्योगिकी केंद्र को इन मामलों की जानकारी भेजी। खुलासा हुआ कि ये सभी लोग आधार सिस्टम में पहले से रजिस्टर्ड थे। सिस्टम में मौजूद जानकारी खंगाल कर सभी लापता लोगों को उनके परिवार से मिला दिया गया। गैर-सरकारी संगठनों ने इन लापता लोगों में से कुछ का पुनर्वास किया था और कुछ को नए परिवार वालों ने अपना लिया था। वर्षों बाद अपने असली परिवार से मिलने के बाद इन लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं है।
जबलपुर से लापता, नागपुर में पला-बढ़ा
मध्य प्रदेश के जबलपुर से आठ साल की उम्र में लापता विकलांग बच्चा नागपुर स्टेशन पर भटक रहा था। वह दत्तक माता-पिता के साथ समर्थ धमले के नाम से रहने लगा। उसने 12वीं की परीक्षा के लिए 2021 में आधार कार्ड के लिए रजिस्ट्रेशन की कोशिश की, लेकिन आवेदन खारिज हो गया। बाद में मनकापुर आधार सेवा केंद्र के मैनेजर अनिल मराठे को पता चला कि आधार पोर्टल पर वह मोहम्मद आमीर के नाम से रजिस्टर्ड है। आमीर (18) को उसके असली परिवार से मिलाया गया।
16 अन्य लोगों को मिलाने की कवायद
नागपुर का आधार सेवा केंद्र 16 अन्य बिछड़े लोगों को उनके परिवार वालों से मिलाने के लिए कागजी कार्रवाई में जुटा है। ये लोग भी वर्षों पहले अपने परिवार से बिछड़ गए थे। हालांकि उनका आधार रजिस्ट्रेशन हो चुका है।
Published on:
29 Aug 2022 11:12 pm
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