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परिसीमन के बाद तेज होगी मुंबई नगर निगम चुनाव की कवायत

देश के सबसे अमीर नगर निगम में द साल से नहीं हुए हैं चुनाव 52 हजार करोड़ रुपये के बजट वाले मुंबई नगर निगम चुनाव के लिए भाषा विवाद के बीच महायुति और महाविकास आघाड़ी में दिलचस्प होगा मुकाबला

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नई दिल्ली/ मुंबई। सब कुछ ठीक रहा तो देश के सबसे अमीर मुंबई नगर निगम में पिछले दो साल से लटके चुनाव साल के आखिर तक हो सकते हैं। 6 सितंबर तक वार्डों के परिसीमन का कार्य पूरा हो जाएगा। हालिया उपजे मराठी भाषा विवाद की छाया में राज्य की सत्ताधारी महायुति और विपक्षी महाविकास आघाड़ी के बीच इस बार नगर निगम का चुनाव दिलचस्प होगा।

ये काम बीएमसी के 227 चुने हुए कॉर्पोरेटर्स का होता है. मगर देश के सबसे अमीर नगर निगम में दो साल से चुनाव नहीं हुए हैं। बृहन्मुंबई महानगर पालिका यानी बीएमसी के दो साल से चुनाव नहीं हुए हैं.मगर बीते दो सालों में नगर पालिका की ओर से फंड सिर्फ़ सत्ता में बैठी बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिव सेना विधायकों को जारी किए गए हैं। इस प्रावधान के तहत बीएमसी के 52 हज़ार करोड़ रुपये के बजट में से क़रीब ढाई फ़ीसदी बजट यानी 1260 करोड़ रुपये 38 विधायकों के लिए रखे जाएंगे. हर विधायक को अपने क्षेत्र में विकास के लिए 35 करोड़ रुपये तक दिए जा सकते हैं।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार ने मुंबई में वार्डों की संख्या 227 से बढ़ाकर 236 कर दी थी। लेकिन, देवेंद्र फडणवीस की महायुति सरकार ने इस निर्णय को रद्द करते हुए फिर से वार्डों की संख्या 227 कर दी। अब इन वार्डों का परिसीमन चल रहा है। छह सितंबर तक परिसीमन की अंतिम रिपोर्ट पेश होनी है। इससे पूर्व बीते 6 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि स्थानीय निकायों के चुनाव तुरंत कराना ज़रूरी है और ये चुनाव इस याचिका में लिए गए फ़ैसले के अधीन होंगे। नगर निगमों की चुनाव प्रक्रिया में वार्डों का गठन और आरक्षण का निर्धारण, विधानसभा मतदाता सूची का वार्डवार विभाजन और चुनाव कराना, ये तीन चरण हैं।