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विदेश में पढ़ाई के बाद 22 फीसदी छात्रों को ही देश में नौकरी

अध्ययन : विदेशी विश्वविद्यालयों में पढऩे का बढ़ रहा चलन  

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विदेश में पढ़ाई के बाद 22 फीसदी छात्रों को ही देश में नौकरी

विदेश में पढ़ाई के बाद 22 फीसदी छात्रों को ही देश में नौकरी

नई दिल्ली. विदेश में पढ़कर लौटने वाले भारतीय छात्रों को खुद के देश में नौकरी पाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालत यह है कि विदेश में पढ़ाई के बाद लौटने वाले मात्र 22 फीसदी विद्यार्थियों को ही देश में रोजगार मिल पाता है। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2022 में 7 लाख 70 हजार से अधिक भारतीय छात्र पढऩे के लिए विदेश गए। यह आंकड़ा गत छह साल में सबसे अधिक है। वहीं साल 2015 से 2019 के बीच विदेश में पढऩे वाले छात्रों में से 22 फीसदी छात्रों को स्वेदश में नौकरी मिल पायी। इसके बावजूद विदेश में अध्ययन का उत्साह कम नहीं हो रहा है। कनाडा की शिक्षा फर्म एम. स्क्वायर मीडिया (एमएसएम) के अध्ययन के मुताबिक भारत में विदेशी डिग्री और डिप्लोमा की पहचान की कमी है। ऐसे मेे नियोक्ता स्थानीय योग्यता और अनुभव को प्राथमिकता देते हैं। एमएसएम के सीईओ संजय लाल के मुताबिक ऐसी स्थिति से बचने के लिए छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही करियर को लेकर सक्रियता दिखानी चाहिए।

इस कारण होती है परेशानी

1. देश में विदेशी डिग्री की मान्यता।

2. भाषा की दिक्कत।

3. स्थानीय नेटवर्क का अभाव।

कनाड़ा सबसे पसंदीदा देश

संसद में उपलब्ध कराए आंकड़ों के अनुसार अधिकांश भारतीय छात्र डिग्री पाठ्यक्रमों के लिए कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन को पसंद करते हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में 2,26,450 भारतीय छात्र कनाड़ा में पढ़ाई के लिए गए हैं।