
नई दिल्ली। शुक्रवार को गुजरात हाईकोर्ट ने साल 2002 के नरोदा पाटिया दंगा मामले पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने भाजपा की पूर्व नेत्री माया कोडनानी को बरी कर दिया है, जबकि बाबू भाई पटेल उर्फ बाबू बजरंगी को उम्र कैद की सजा सुनाई है। जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस एएस सुपेहिया की खंड ने मामले की सुनवाई करते हए यह फैसला सनाया है। गौरतलब है कि बाबू बजरंगी को निचली अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।
बाबू बजरंगी का हिन्दू संगठन से पुराना नाता
बाबू भाई पटेल उर्फ बाबू बजरंगी का हिन्दू संगठन से पुराना नाता रहा है। साल 2002 में बाबू बजरंगी गुजरात में बजरंग दल का नेता था। उसी साल अगस्त में गुजरात दंगा हुआ और वो काफी सुर्खियों में छाया रहा है। गुजरात दंगों के दो साल बाद बाबू बजरंगी विश्व हिन्दू परिषद में शामिल हो गया। वहां भी उसका मन नहीं लगा तो बाबू बजरंगी ने उस संगठन को छोड़ दिया और शिवसेना में शामिल हो गया।
2007 में फिर आया चर्चा में
साल 2007 में जब तहलका ने स्टिंग ऑपरेश किया तो एक बार फिर बाबू बजरंगी चर्चा में आया। इस स्टिंग ऑपरेशन में बाबू बजरंगी ने कहा था कि उसने अहमदाबाद में 28 फरवरी, 2002 को मुसलमानों के नरसंहार के लिए भीड़ को उकसाने का काम किया था। साथ ही बम और बंदूकें भी मुहैया कराई थी। इस स्टिंग ऑपरेशन में बाबू बजरंगी ने इस नरसंहार का कारण 27 फरवरी, 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में 59 कारसेवकों की जलने से हुई मौत को बताया था।
अब सलाखों के पीछे गुजरेगी बाबू बजरंगी की जिंदगी
पहले से ही उम्र कैद की सजा काट रहे बाबू बजरंगी को गुजरात हाईकोर्ट ने भी उम्र कैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही बाबू बजरंगी की जिंदगी सलाखों के पीछे ही गुजरेगी।
Published on:
20 Apr 2018 03:48 pm
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