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यकीन मानिए खरगे व राहुल जो बात कहेंगे, वो काम होकर रहेगा-पवन खेड़ा

शादाब अहमदनई दिल्ली। कांग्रेस मीडिया और विज्ञापन विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा कि राजस्थान व छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार है, वहां हमारे कामकाज पर चुनाव लड़ा जाएगा। जबकि मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार व तेलंगाना में केसीआर सरकार की विफलता सबसे बड़े मुद्दे होंगे। खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी पर देश का यकीन लगातार बढ़ रहा है। वे अलग-अलग तरह के लोगों से मिलते हैं और उनके जीवन को सुधारने की कोशिश करते हैं। भारत जोड़ो यात्रा के कारण ही राजस्थान की गहलोत सरकार ने डिलीवरी बॉयज के लिए शुरू की है। खेड़ा ने यह बातें पत्रिका से विशेष साक्षात्कार में कहीं। पेश में उनके साक्षात्कार के प्रमुख अंश-

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सवाल : पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है, क्या रणनीति रहेगी ?

जवाब : राजस्थान व छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार है, जहां हमारी योजनाओं के आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं। राजस्थान में चिरंजीवी, ओल्ड पेंशन स्कीम, पट्टा देने की योजना, 100 यूनिट तक फ्री बिजली समेत अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं शामिल है। जबकि छत्तीसगढ़ में भी अनेक अच्छी योजनाएं चल रही है। मध्यप्रदेश में पिछले 18-20 साल की शिवराज सरकार की नाकामी, भाजपा के धोखे और पिछले दरवाजे से जनादेश चुराकर सरकार बनाना बड़ा मुद्दा है। जबकि तेलंगाना में क्षेत्रीय दल से मुकाबला है। केसीआर सरकार की 10 साल की एंटी इंकबेंसी है। रायतु बंधु, दलित बंधु योजनाओं की हकीकत जनता के बीच ले जाने से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। खम्मम में राहुल गांधी की सभा में दो लाख से अधिक लोगों का आए। अनेक दलों के वरिष्ठ नेता कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। चारों ही राज्यों में कांग्रेस के पक्ष में लहर बनती दिख रही है।

सवाल : चुनाव में क्या गारंटी कार्यक्रम मुद्दा बनेंगे?

जवाब : राहुल गांधी के अध्यक्ष रहते हुए 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने तय किया था कि घोषणा पत्र सिर्फ कागज का टुकड़ा न होकर वचन पत्र बनाया जाए। जो कहेंगे वो ही करेंगे। आपने देखा होगा कि 2018 में राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में एक ही दिन शपथ ग्रहण समारोह हुआ था। तीनों जगह तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी गए थे, रात को राहुल के दिल्ली पहुंचने से पहले कांग्रेस सरकारों ने अपना काम शुरू कर दिया था। यकीन मानिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व राहुल जो बात कहेंगे, वो काम होकर रहेगा। कर्नाटक इसका ताजा उदाहरण है।

सवाल: सभी राज्यों में पार्टी आंतरिक कलह से जूझ रही है, इस चुनौती से कैसे निपटेंगे?

जवाब: भीतर जो होता है, वो एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। जैसे मेरी महत्वकांक्षा है, जाहिर सी बात है अन्य लोगों की भी महत्वकांक्षा होगी। यह सभी का अधिकार है। कई महत्वकांक्षा होती है, काम करने के तरीके और सोच मत अलग-अलग होते हैं, लेकिन लड़ाई की जब बात आती है तब हम एक होकर लड़ते हैं। इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

सवाल: यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि कांग्रेस के सोशल मीडिया कंटेंट में कोई अपुष्ट-भ्रामक-फेक जानकारी नहीं होगी।

जवाब: यह तो आप रास्ते चलते किसी से पूछ लीजिए, वो आपको बताएंगे कि वाट्स एप यूनिवर्सिटी कौन चलाता है और भ्रामक जानकारी व तथ्य कौन फैलाता है। पूरा विश्व जान चुका है कि भाजपा फेक न्यूज फेक्ट्री व वाट्स एप यूनिवर्सिटी चलाती है। भाजपा के नेता आज से झूठ नहीं बोल रहे हैं। वाट्स एप जैसे टूल तो आज आए हैं। हम बचपन से सुनते आए हैं कि आरएसएस की फुल फॉर्म रयूमर स्प्रेडिंग सोसायटी है। अब सोशल मीडिया गया तो यह नेहरू जी, राहुल गांधी के लिए अफवाह फैलाते हैं। लोगों को पता है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ।

सवाल: अभी राहुल गांधी को लेकर जो रील्स की सीरीज चल रही है, उसमें रियल लोग और वास्तविक बातचीत है, क्या देशवासी यकीन कर सकते हैं।

जवाब: पूरा देश देख रहा है कि राहुल गांधी ने सैकड़ों पत्रकार वार्ताएं कर आप जैसे पत्रकारों से चर्चा की। भारत जोड़ो यात्रा व उसके बाद ट्रक चालकों, मैकेनिक, ढाबा संचालकों, डिलीवरी बॉयज से मिले और उनकी जीवनशैली व समस्याओं को समझा। ऐसे लोगों के जीवन को सुधारने के लिए पार्टी के भीतर और जहां हमारी सरकार है, वहां नीति बनाकर राहत देने की कोशिश करते हैं। भारत जोड़ो यात्रा की वजह से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डिलीवरी बॉयज के लिए योजना शुरू की है। तेलंगाना में धरणी नाम का सरकारी पोर्टल चलता है, जिसके खिलाफ किसानों में रोष है। वहां पार्टी ने एक एप बनाया है। राहुल के इन कामों से देशवासी यकीन कर सकते हैं और कर भी रहे हैं।

सवाल: क्या सोशल मीडिया से वोटर का निर्णय बदल रहा है, क्या यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक चलन नहीं है। ग्राउंड वर्किंग कम होती जा रही है।

जवाब: कांग्रेस हमेशा ग्राउंड वर्किंग पर ही विश्वास करती है। राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा में 4 हजार किलोमीटर जमीन पर ही चले हैं। कांग्रेस सोशल मीडिया, मीडिया और ग्राउंड का मिश्रण करती है। ग्राउंड एक्टिविटी जितनी होनी चाहिए, उतना करते हैं, जिस पर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और राहुल कोई समझौता नहीं करते हैं। कर्नाटक चुनाव में यह दिखाया भी है।