
अभिषेक सिंघल
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव जीतने के बाद जहां एक तरफ तृणमूल कांग्रेस में हर स्तर पर टूट स्पष्ट होती जा रही है वहीं दूसरी तरफ भाजपा के प्रति आमजन में रुझान तेजी से बढ़ा है। यह बढ़ती लोकप्रियता पार्टी नेतृत्व के सामने एक नई संगठनात्मक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है और पार्टी जहां नए कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ना भी चाहती है वहीं उसके सामने यह भी चुनौती है कि उन्हें किस तरह से पार्टी से जोड़ा जाए।
निचले और मझौले स्तर को शामिल करने की तैयारी चुनाव जीतने के तुरंत बाद जहां एक ओर पार्टी में नए लोगों के शामिल होने पर रोक लगा दी थी वहीं दूसरी और पार्टी के नेतृत्व का मानना है कि नए कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाने की आवश्यकता है। पार्टी के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं का आचरण पिछले वर्षों में खराब रहा होगा। ऐसे में पार्टी को निचले और मझौले स्तर पर समाज में उचित भूमिका निभाने वाले लोगों को शामिल करना होगा। पर इसके लिए उन्हें भाजपा की कार्यपद्धति, वैचारिक आधार और संगठनात्मक अनुशासन से परिचित कराने की आवश्यकता है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा पश्चिम बंगाल में संगठन विस्तार के अगले चरण के तहत एक विशेष रणनीति पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य पार्टी में नए आ रहे कार्यकर्ताओं और नेताओं को संगठन की रीति-नीति, विचारधारा और कार्यसंस्कृति से व्यवस्थित रूप से जोड़ना है। सरकार में आने के बाद पार्टी के वर्तमान पदाधिकारी भी पार्टी की लाइन पर चलें और पार्टी की रीति- नीति को आगे बढ़ाएं यह जरूरी है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और वैचारिक परिचर्चाओं की श्रृंखला आयोजित किए जाने की योजना है।
भाजपा ने जहां चुनाव अभियान के दौरान फुटबाल क्लबों, युवा क्लबों के जरिए युवाओं में आधार बढ़ाया था वहीं अब पार्टी की जीत के बाद वहां पहले से सक्रिय क्लबों और यूनियनों के पदाधिकारियों की ओर से पार्टी के नेताओं से सम्पर्क किया जा रहा है। सरकार बनने के बाद से मिल रहे इस अपार समर्थन को संभालने को भी एक चुनौती की तरह लेते हुए इन क्लबों और संगठनों को पार्टी और विचारधारा के विभिन्न स्तरों पर जोड़े जाने की योजना बन रही है।
भाजपा के एक उच्च पदस्थ सूत्र के अनुसार विधानसभा चुनावों के दौरान और उससे पहले से ही चार सांसद भाजपा के सम्पर्क में थे। इनमें से एक के पास अभी टीएमसी में विद्रोह का नेतृत्व भी है। वहीं पार्टी का यह भी मानना है कि सभी विधायकों और सांसदों का पिछली सरकार की नीतियों और कारनामों से सीधा सम्पर्क नहीं था। पार्टी में इस प्रकार से नई एंट्री पर पुराने कार्यकर्ताओं में जरूर थोड़ी असहजता है जिस पर पार्टी के नेतृत्व ने उन्हें तीन महीने इंतजार करने को कहा है।
Updated on:
12 Jun 2026 10:48 am
Published on:
12 Jun 2026 10:47 am
