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मेड इन इंडिया चिप्स से चलेंगी यूरोप, जापान और अमेरिका में गाड़ियां

- असम में देश का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर प्लांट इस साल हो जाएगा तैयार, 2026 से बनने लगेंगे चिप्स - केंद्रीय रेल, आईटी और सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 40 हजार कर्मचारियों वाले प्रोजेक्ट का किया निरीक्षण

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नवनीत मिश्र

गुवाहाटी। असम के मोरीगांव में देश का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर प्लांट इसी साल बनकर तैयार हो जाएगा और अगले साल से चिप्स भी बनने लगेंगी। मेड इन इंडिया और मेड इन असम सेमीकंडक्टर का उपयोग भारत ही नहीं बल्कि यूरोप, जापान और अमेरिका के ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी हो सकेगा। केंद्रीय रेल, आईटी और सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को असम के जगीरोज में टाटा की ओर से 27 हजार करोड़ की लागत से तैयार कराए जा रहे सेमीकंडक्टर यूनिट का निरीक्षण किया। इस दौरान वैष्णव ने कहा कि पहला प्लांट 2025 में बनकर तैयार हो जाएगा और 2026 से चिप्स का निर्माण शुरू हो जाएगा। यहां से यूरोप, जापान और अमेरिका भेजे जाने वाले चिप्स वहां की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में उपयोग हो सकेंगे।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि दुनिया का सबसे उन्नत सेमीकंडक्टर उद्योग असम में मां कामाख्या देवी की पवित्र भूमि पर स्थापित किया जा रहा है। यह भारत का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर प्लांट होगा। इस पहल की नींव प्रधानमंत्री के "अष्ट लक्ष्मी" राज्यों को विकसित करने की सोच में छिपी है। वैष्णव ने सेमीकंडक्टर प्लांट के निर्माण के लिए जरूरी इकोसिस्टम की समीक्षा से संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा कि यहां लगभग 40,000 कर्मचारी काम करेंगे। उनके लिए आवास सुविधाएं और एक संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सिटी की योजना बनाई जा रही है। यह देखकर खुशी है कि प्लांट का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

चीन, ताइवान पर खत्म होगी निर्भरता

भारत को अभी तक मोबाइल और ऑटो इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर के लिए चीन, ताइवान जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन, मोदी सरकार ने देश को सेमीकंडक्टर के मोर्चे पर आत्मनिर्भर बनाने के लिए गुजरात में दो और असम में एक प्लांट के निर्माण की कवायद शुरू की। असम और गुजरात में कुल दो प्लांट टाटा की ओर से लगाए जा रहे हैं।