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नौसेना का बदल गया निशान, जानिए क्या है खास

औपनिवेशिक अतीत भुला ते हुए भारतीय नौसेना का निशान यानी ध्वज भी बदल गया है। आजादी के बाद निशान में पांचवी बार हुए बदलाव के बाद अब ये पूरी तरह भारतीय नजर आएगा, जिस पर तिरंगे के साथ भारत में एक तरह से नौसेना की शुरुआत करने वाले छत्रपति शिवाजी का स्वर्णिम काल भी सुनहरे अक्षरों में प्रतिबिम्बित होगा।

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नौसेना का बदल गया निशान, जानिए क्या है खास

नौसेना का बदल गया निशान, जानिए क्या है खास

नई दिल्ली/कोच्चि. भारतीय नौसेना #IndianNavvy का निशान 2 सितम्बर को औपनिवेशिक अतीत से निकलकर पूरी तरह भारतीय रंग में रंग गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी #PMModi ने एक सैन्य समारोह में नौसेना के नए निशान (ध्वज) का अनावरण किया। इसके साथ ही क्रॉस ऑफ सेंट जॉर्ज कही जाने वाली अंग्रेजों के जमाने की निशानी भी अतीत में समा गई।

अब नौसेना के सफेद ध्वज के ऊपरी कौने पर हमारा तिरंगा और बगल में दायीं ओर नीले रंग के बैकग्राउंड में अशोक स्तम्भ व छत्रपति शिवाजी की राजमुद्रा के आकार में नौसेना का प्रतीक सुनहरे रंग में चमक रहा है। इसके नीचे संस्कृत में 'शं नो वरुणः' लिखा है, जिसका अर्थ है 'वरुण देव हमारे लिए शुभ हो।'

नौसेना के निशान में आजादी के बाद यह पांचवा बदलाव है। सबसे पहले 1950 में रॉयल नेवी की जगह इंडियन नेवी बनते ही निशान से यूनियन जैक हटाकर तिरंगा लगाया गया, लेकिन सेंट जॉर्ज क्रॉस बना रहा। दूसरा बदलाव 2001 में हुआ जब ध्वज से लाल रंग वाला क्रॉस हटाकर बगल में नीले रंग में अशोक चिह्न लगा दिया गया। नीला रंग समुद्र व आसमान में मिल जाने के कारण यह नजर नहीं आने की आपत्ति के बाद साल 2004 में फिर लाल रंग का क्रॉस जोड़कर इसके बीचो बीच अशोक स्तम्भ लगा दिया गया। फिर 2014 में अशोक चिह्न के नीचे ही 'सत्यमेव जयते' लिखने का बदलाव हुआ। अब पांचवी बार बदलाव हुआ है।

प्राचीन इतिहास है नौसेना का

वैसे तो नौसेना का उल्लेख वैदिक काल में भी मिलता है, लेकिन प्राचीन इतिहास में नौंवी शताब्दी के चोला साम्राज्य के वक्त भी नौसेना की अहमियत सामने आती है। कहा जाता है कि चोल शासक राजेन्द्र प्रथम की नौसेना इतनी ताकतवर थी कि उसने पूरे बंगाल की खाड़ी पर दबदबा स्थापित कर लिया था। चोल शासक राजराज प्रथम ने जहां श्रीलंका के उत्तरी हिस्से को जीता था तो इसके बाद राजेन्द्र प्रथम ने विशाल नौसेना के बूते पूरी श्रीलंका जीत ली।

शिवाजी को श्रेय

असल में छत्रपति शिवाजी के वक्त भारतीय नौसेना का जन्म माना जाता है। सत्रहवीं शताब्दी में समुद्री तटों को विदेशी हमलावरों से बचाने के लिए शिवाजी ने पहली बार करीब पांच दर्जन जंगी जहाजों व पांच हजार जवानों के साथ नौसेना बनाई। एडमिरल कान्होजी आंग्रे के नेतृत्व में शिवाजी की नौसेना ने अंग्रेजों के साथ डच व पुर्तगालियों से मुकाबला करते हुए कोंकण तट पर कब्जा किया। नौसेना के शुक्रवार को लॉन्च नया निशान (ध्वज) भी शिवाजी से प्रेरित है। नौसेना अरसे से आईएनएस शिवाजी व आईएनएस आंग्रे का इस्तेमाल भी करती है।

भारतीय नौसेना की ताकत
70 हजार सक्रिय सैनिक

75 हजार रिजर्व सैनिक
150 जहाजों और पनडुब्बियों का बेड़ा

300 नौसेना विमान