
संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस का गोला दागता पुलिसकर्मी (Photo: IANS)
Delhi CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के छात्र आंदोलन के दौरान पैलेट गन की चपेट में आए 25 वर्षीय कलाकार प्रशांत अब भी दर्द से जूझ रहे हैं। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के एक सप्ताह बाद भी प्रशांत के शरीर में पैलेट गन के कई छर्रे धंसे हुए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ छर्रे निकाल दिए गए हैं, लेकिन कुछ छर्रे अब भी मांसपेशियों और टिश्यूज में काफी गहराई तक धंसे हुए हैं, जिन्हें निकालना आसान नहीं है।
दिल्ली के रहने वाले प्रशांत का इलाज लोक नायक अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उनके सीने के दाहिने हिस्से, दाहिने ऊपरी हाथ और दाहिने पैर में पैलेट के छर्रे लगे थे। कम गहराई वाले कुछ छर्रों को फोर्सेप की मदद से निकाल दिया गया, लेकिन जो छर्रे मांसपेशियों के भीतर गहराई तक चले गए हैं, उन्हें निकालना फिलहाल मुश्किल है। डॉक्टरों ने प्रशांत को फिलहाल निगरानी में रखने और नियमित मेडिकल जांच कराते रहने की सलाह दी है।
प्रशांत ने घटना को याद करते हुए बताया कि वह 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन को समझने और अपनी कला के जरिए उसे चित्रों में उतारने पहुंचे थे। वह वहां प्रदर्शनकारियों की स्केचिंग कर रहे थे।
उनके मुताबिक, अचानक उन्हें अपने दाहिने हाथ पर कुछ टकराने का एहसास हुआ। इसके तुरंत बाद उनकी उंगलियों तक खून बहने लगा। पहले उन्हें लगा कि किसी पुलिसकर्मी ने पीछे से मुक्का मारा है, लेकिन जब उन्होंने अपनी काली टी-शर्ट पर खून देखा और हाथ सूजने लगा, तब उन्हें समझ आया कि उन्हें पैलेट गन के छर्रे लगे हैं।
प्रशांत पेशे से एक ग्राफिक कलाकार हैं। उन्होंने बताया कि वह 6 जून से जंतर-मंतर जाकर छात्र आंदोलन को करीब से देख रहे थे। उनका मकसद किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल होना नहीं, बल्कि आंदोलन के माहौल और वहां मौजूद लोगों की भावनाओं को अपनी पेंटिंग और स्केच में कैद करना था।
उन्होंने कहा कि वह प्रदर्शनकारियों को पत्थर नहीं फेंकने और पुलिस से भिड़ने से बचने की सलाह भी दे रहे थे, लेकिन हालात अचानक बिगड़ गए और वह खुद इसकी चपेट में आ गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जुलाई को जब जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी संसद मार्च के लिए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहें थे तो कनॉट प्लेस पर उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई। कनॉट प्लेस में हुए हंगामे के बारे में बताते हुए प्रशांत ने कहा कि एक तरफ प्रदर्शनकारी पथराव कर रहे थे, तो दूसरी तरफ पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ रही थी। इसी दौरान वह कथित तौर पर आरएएफफ जवान द्वारा चलाये गए पैलेट गन की चपेट में आ गए।
अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में गहराई तक धंसे पैलेट को निकालना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए फिलहाल केवल सतह के पास मौजूद छर्रे ही निकाले गए हैं। बाकी छर्रों की नियमित जांच की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर आगे उपचार किया जाएगा।
पिछले हफ्ते दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। दिल्ली पुलिस ने ‘एक्स’ पर कहा, "यह दावा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, पूरी तरह गलत और भ्रामक है। दिल्ली पुलिस के पास पैलेट गन हैं ही नहीं और न ही प्रदर्शन के दौरान उनका इस्तेमाल किया गया है।"
Updated on:
28 Jul 2026 12:22 pm
Published on:
28 Jul 2026 12:00 pm
