
संसद के बाहर पप्पू यादव का अनोखा अंदाज, माथे पर प्लास्टर देख हर कोई रह गया हैरान | फोटो सोर्स- ANI
Parliament Monsoon Session: मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव अलग अंदाज में संसद पहुंचे। पप्पू यादव के माथे पर मेडिकल प्लास्टर (पट्टी) बंधा हुआ था और उनके हाथ में एक बड़ी सी लाठी थी। संसद भवन के बाहर जैसे ही मीडिया और अन्य नेताओं की नजर उन पर पड़ी, हर कोई हैरान हो गया। पप्पू यादव का यह अंदाज किसी चोट की वजह से नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के हक में उनका एक अनोखा विरोध प्रदर्शन था।
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत और अपने इस रूप के जरिए पप्पू यादव ने देश में चल रहे NEET पेपर लीक विवाद और हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर समेत अन्य जगहों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिसिया बल प्रयोग का कड़ा विरोध जताया। माथे पर पट्टी और हाथ में लाठी लेकर वह यह संदेश देना चाह रहे थे कि सरकार हक की आवाज उठाने वाले युवाओं और छात्रों पर लाठियां बरसा रही है। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य (छात्र) सड़कों पर न्याय मांग रहा है और उन पर लाठियां चलाई जा रही हैं। यह लाठी और पट्टी उसी दमनकारी नीति के खिलाफ एक विरोध है।
संसद के इस मानसून सत्र में आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। दोपहर 2 बजे के करीब लोकसभा में 'एंटी पेपर लीक बिल' पर बड़ी बहस होने की उम्मीद है। पिछले करीब एक हफ्ते से NEET पेपर लीक मामले और छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर संसद में लगातार गतिरोध और हंगामा चल रहा था।
इस गतिरोध को दूर करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं के साथ लगातार बैठकें की। स्पीकर की कोशिशों के बाद अब सभी दल मंगलवार को इस बेहद जरूरी विधेयक पर चर्चा करने के लिए राजी हो गए हैं। माना जा रहा है कि अगर आज चर्चा हो जाती है, तो संसद में कामकाज दोबारा ठीक से शुरू हो पाएगा।
सरकार तो सोमवार को ही इस कानून पर चर्चा चाहती थी। लेकिन विपक्ष का कहना था कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जो लाठीचार्ज हुआ है, सरकार पहले उस पर जवाब दे।
हंगामे के चलते सोमवार को सदन की कार्यवाही बार-बार रोकनी पड़ी और शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी। तब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दोनों पक्षों को बातचीत से रास्ता निकालने के लिए तीन घंटे का समय दिया था और स्पष्ट कहा था कि यह सदन नारे लगाने के लिए नहीं, बल्कि देश के जरूरी विधेयकों पर गंभीर चर्चा करने के लिए चुना गया है। इस बिल पर चर्चा के लिए कुल 6 घंटे तय किए गए हैं, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है।
Updated on:
28 Jul 2026, 1:20 PM IST
Published on:
28 Jul 2026, 12:24 PM IST
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