
Supreme Court CJP protest : सीजेपी प्रदर्शन के दौरान हुई ज्यादतियों के जिम्मेदारों पर कार्रवाई करें: सुप्रीम कोर्ट (फोटो सोर्स:@Yinks24_7)
Supreme Court Security Crackdown: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 20 जुलाई के मार्च के दौरान हुए छात्र विरोध प्रदर्शन पर पुलिस के कड़े सुरक्षा तंत्र और कथित बल प्रयोग के मामले में देश की शीर्ष अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है या कानून को अपने हाथ में लिया है, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पूरे घटनाक्रम की एक पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य न्यायाधीश ने बेहद कड़े शब्दों में कहा:
"मामले की जांच पूरी तरह से स्वतंत्र होनी चाहिए। जिसने भी सीमाओं को लांघा है, कानून अपना काम करेगा। अगर मामले में अंतिम रूप से जिम्मेदारी तय ही न की जाए, तो ऐसी किसी भी जांच का कोई मतलब या औचित्य नहीं रह जाता।"
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने प्रदर्शनकारी युवाओं और छात्रों पर इलेक्ट्रिक बैटन (शॉक देने वाली लाठियां) के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया, तो अदालत ने प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता की वकालत की।
'सिर्फ आंदोलन होने का मतलब यह नहीं कि लाठियां बरसाई जाएं'
इससे पूर्व की सुनवाई में भी शीर्ष अदालत ने छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग की कड़े शब्दों में निंदा की थी। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करने वाले नागरिकों और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों—दोनों का ही अनुशासित रहना आवश्यक है।
अदालत ने कहा:
समान चिंता: प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ घायल पुलिसकर्मियों को लेकर भी कोर्ट समान रूप से चिंतित है।
कोई तात्कालिक उकसावा नहीं: महज कोई विरोध प्रदर्शन या आंदोलन खड़ा हो गया है, इसका अर्थ यह कदापि नहीं हो सकता कि वहां तुरंत लाठीचार्ज कर दिया जाए।
राष्ट्रव्यापी नीति: यह केवल किसी एक शहर या दिल्ली तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की स्थिति से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
हिंसा पर रोक: जैसे पुलिस मनमानी लाठियां नहीं चला सकती, वैसे ही शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा की भी कोई जगह नहीं हो सकती।
इस सुनवाई का दायरा केवल दिल्ली के Jantar Mantar तक सीमित नहीं रहा। वकीलों द्वारा बिहार में छात्र प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा AK-47 राइफल लहराने और इस्तेमाल के बेहद चौंकाने वाले दावे भी कोर्ट के समक्ष रखे गए।
इन तमाम परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह जल्द ही पूरे देश के लिए 'विरोध प्रदर्शन एवं पुलिस बल प्रयोग' (Guidelines on Public Protests) से जुड़े व्यापक नियम व दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार कर रहा है।
गौरतलब है कि NEET और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली व पेपर लीक के विरोध में युवाओं का गुस्सा उबल रहा था। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों युवाओं ने 20 जुलाई को संसद घेराव का आह्वान किया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पों में सैकड़ों छात्र और पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसी मामले के बाद देश भर में चौतरफा राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है।
अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब देखना यह होगा कि स्वतंत्र जांच एजेंसी की रिपोर्ट में किस-किस अधिकारी और प्रदर्शनकारी पर गाज गिरती है।
Updated on:
28 Jul 2026 12:41 pm
Published on:
28 Jul 2026 12:22 pm
