
कांग्रेस आलाकमान ने दोहराई कर्नाटक की कहानी
नई दिल्ली। कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान का सियासी बवंडर थामने की दिशा में भी सम्भवतः कर्नाटक की कहानी ही दोहराई है। पिछले चार साल से एक दूसरे को जमीन सुंघाने की कोशिश में लगे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को एक साथ चौथी बार एक ही फ्रेम में लाने में आलाकमान कामयाब तो हो गया, लेकिन यह नहीं बताया गया कि गहलोत-पायलट किसी फॉर्मूले पर एक साथ काम करने को राजी हुए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ये तल्खियां कब पूरी तरह खत्म होगी, जबकि विधानसभा चुनाव में छह माह से भी कम समय बचा है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में आलाकमान ने दोनों नेताओं के सामने स्पष्ट कर दिया है कि राजस्थान में सत्ता वापसी और आम चुनाव में भाजपा को हराना पार्टी का लक्ष्य है। इसके लिए मतभेद 'जाजम के नीचे' दबाकर काम करना होगा। साथ ही गहलोत को 'जीओ और जीने दो' और पायलट को धैर्य रखने की सलाह दी गई है।
पार्टी ने दोनों नेताओं के गिले-शिकवे सुन कर आश्वस्त किया है कि दोनों की सम्मानजनक भूमिकाएं तय कर दी जाएगी। इसकी पुष्टि दिल्ली से रवाना होने से पहले गहलोत की मीडिया से बातचीत में भी हो गई, जब उन्होंने कहा कि अच्छी बैठक हो गई। सभी ने अपनी बात रख दी। अब खड़गे जी जानें और राहुल जी जानें। सचिन की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर गहलोत ने कहा कि भूमिका तय करने का काम आलाकमान का है।
नरम पड़े दिखे तेवर
पायलट के प्रति बयानों में कई बार तल्खी दिखा चुके गहलोत के तेवर बैठक के बाद नरम दिखे। गहलोत को पायलट के अल्टीमेटम व उनकी शर्तों के बारे में कई बार कुरेदा गया, लेकिन उन्होंने एक ही जवाब दिया मिलकर काम करेंगे।
अब उलझन आलाकमान की
प्रेक्षकों के अनुसार गहलोत-पायलट राजी तो हो गए हैं, लेकिन अपना फॉर्मूला लागू करवाने में आलाकमान को फूंक-फूंक कर ही कदम रखना होगा क्योंकि पायलट को प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने का फैसला भी इतना आसान नहीं है। मंत्रिमंडल में फेरबदल और पायलट की मांगों पर कार्रवाई जरूर आग पर छींटों का काम कर सकते हैं। इसमें भी दोनों को संतुष्ट बनाए रखना कम चुनौतीपूर्ण नहीं होगा।
Published on:
30 May 2023 09:45 pm
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