
लोकार्पण पर तकरार, 19 विरोधी दल करेंगे बहिष्कार
नई दिल्ली। नए संसद भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री के हाथों करवाए जाने को लेकर सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तकरार बढ़ गई है। कांग्रेस समेत 19 विपक्षी दलों ने बुधवार को संयुक्त में कहा कि जब लोकतंत्र की आत्मा को संसद से निष्कासित कर दिया गया है, तो हमें नई इमारत में कोई मूल्य नहीं दिखता, इसलिए हम नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार के सामूहिक निर्णय की घोषणा करते हैं।
संयुक्त बयान में कहा गया कि नए संसद भवन का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण अवसर है। मोदी सरकार ने निरंकुश तरीके से नए संसद भवन का निर्माण किया है। यह महामारी के दौर में बड़ा खर्च कर बनाया गया। इसमें भारत के लोगों या सांसदों से कोई परामर्श नहीं लिया गया। इसके बावजूद विपक्ष उद्घाटन समारोह के अवसर पर मतभेदों को भुलाने को तैयार था। राष्ट्रपति मुर्मू को पूरी तरह से दरकिनार कर नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी के हाथों करवाने का निर्णय लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
बयान में संविधान के अनुच्छेद 79 का हवाला देते हुए कहा गया कि राष्ट्रपति न केवल भारत में राज्य का प्रमुख होता है बल्कि संसद का एक अभिन्न अंग होता है। राष्ट्रपति के बिना संसद कार्य नहीं कर सकती है। फिर भी प्रधानमंत्री का राष्ट्रपति के बिना नए संसद भवन का उद्घाटन करने का निर्णय राष्ट्रपति के उच्च पद का अपमान और संविधान के पाठ और भावना का उल्लंघन है। यह सम्मान के साथ सबको साथ लेकर चलने की उस भावना को कमजोर करता है, जिसके तहत देश ने पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति का स्वागत किया था।
ये दल आए साथ में
सामूहिक बहिष्कार के फैसले में कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, जदयू, आम आदमी पार्टी, एनसीपी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), माकपा, भाकपा, सपा, राजद, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, झामुमो, नेशनल कांफ्रेंस, केरल कांग्रेस-मणि, आरएसपी, विदुथलाई चिरुथिगल कच्ची, एमडीएमके और आरएलडी शामिल है।
ये 'कभी हां, कभी ना' के मूड में
बसपा, वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी व बीजेडी जैसे दलों ने बहिष्कार को लेकर कोई फैसला नहीं किया है, लेकिन किसान कानूनों के मुद्दे पर भाजपानीत एनडीए का साथ छोड़ने वाले शिरोमणि अकाली दल ने समारोह में शामिल होने की घोषणा कर दी है। माना जा रहा है कि बीजेडी व वाइएसआर कांग्रेस समारोह में शामिल हो सकते हैं। बीजेडी, टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के नेता नई संसद के शिलान्यास समारोह में भी शामिल हुए थे।
केसीआर कांग्रेस को लेकर दुविधा में
बीआरएस के मुखिया व तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव बहिष्कार के फैसले को लेकर असमंजस में हैं। दरअसल, तेलंगाना में इसी साल चुनाव है। वहां कांग्रेस बीआरएस से सीधे मुकाबले में हैं। ऐसे में वे कांग्रेस की अगुवाई वाले किसी भी मोर्चे में शामिल होने से पहले कतरा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार केसीआर ने फिलहाल विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस-भाजपा से समान दूरी बनाए रखने की नीति अपना रखी है। बहिष्कार में शामिल होने की बजाय वे आयोजन से दूरी होने का फैसला कर सकते हैं।
Published on:
24 May 2023 10:20 pm
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