
ज्योतिर्मठ के शिवलिंग में दरार
जोशीमठ (उत्तराखंड). जोशीमठ शहर में अब तबाही के मंजर साफ नजर आने लगा हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को जोशीमठ का दौरा किया और लोगों को सुरक्षा का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जरूरत पडऩे पर सरकार लोगों को एयरलिफ्ट कराएगी। इस बीच जोशीमठ के सबसे प्रसिद्ध और लोगों की आस्था के केंद्र ज्योतिर्मठ परिसर और शंकराचार्य माधव आश्रम मंदिर के शिवलिंग में भी दरारें आ गईं हैं। ज्योतिर्मठ के प्रभारी ब्रह्मचारी मुकुंदानंद ने बताया कि मठ के प्रवेश द्वार, लक्ष्मी नारायण मंदिर और सभागार में दरारें दिखाई देने लगी हैं। इसी परिसर में टोटकाचार्य गुफा, त्रिपुर सुंदरी राजराजेश्वरी मंदिर और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की गद्दी स्थल है। भू-धंसाव से नृसिंह भगवान के मंदिर को भी खतरा पैदा हो गया है। वहीं ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ज्योतिर्मठ भी इसकी चपेट में आ रहा है। प्रदेश सरकार को भू-धंसाव से प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत पहुंचाने और पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष से जमीन धंसने के संकेत मिल रहे थे, लेकिन किसी ने भी रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया। वहीं रविग्राम वार्ड के लोगों ने आपदा सचिव डॉ. रंजीत सिंह को भी जमकर खरी-खोटी सुनाई।
अविमुक्तेश्वरानंद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
नई दिल्ली. जोशीमठ में भू-धंसाव का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेरानंद सरस्वती महाराज ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। अधिवक्ता परमेश्वर नाथ मिश्र ने याचिका में कहा है कि भू धंसाव की जद में ढाई हजार साल से भी ज्यादा प्राचीन मठ भी आ गया है। सुप्रीम कोर्ट शहर को बचाने के लिए सरकार को तत्काल कार्रवाई का आदेश दे। याचिका में केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार, एनटीपीसी, बीआरओ और डीएम चमोली को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आर्थिक मदद मुहैया कराने का भी आदेश देने का आग्रह किया है।
बद्रीनाथ हाईवे पर दरारें, सेना का चीन सीमा से कट सकता है संपर्क
चीन की सीमा तक पहुंचने के लिए सामरिक महत्व का बद्रीनाथ हाईवे भी भू-धंसाव की जद में आ चुका है। राजमार्ग पर बड़ी-बड़ी दरारें चिंता का कारण बन गई हैं। ये दरारें नहीं थमीं तो हाईवे का एक बड़ा हिस्सा जमींदोज हो सकता है। ऐसे में भारतीय सेना की पहुंच चीन की सीमा से कट सकती है। सीमांत जिले चमोली के जोशीमठ से बदरीनाथ की दूरी करीब 45 किमी है। बद्रीनाथ से आगे का रास्ता माणा होते हुए चीन सीमा की ओर जाता है। इस भू-धंसाव को लेकर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को नई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Published on:
08 Jan 2023 12:37 am
बड़ी खबरें
View Allनई दिल्ली
दिल्ली न्यूज़
ट्रेंडिंग
