
दिल्ली में जमीनों-मकानों के सर्किल रेट बदलने की तैयारी।
Delhi Circle Rate Revision: दिल्ली में लगभग डेढ़ दशक के बाद सर्किल रेट बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है। रेखा सरकार की योजना के तहत अब राष्ट्रीय राजधानी में लोकेशन, फार्महाउस की वैल्यू और नई कैटेगरी के तहत सर्किल रेटों की जल्द ही घोषणा हो सकती है। इससे घर, दुकान और फार्महाउस समेत खेतिहर जमीनों की कीमतों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे पहले साल 2008 में जमीनों का सर्किल रेट बढ़ा था, जबकि साल 2014 में प्रॉपर्टी के सर्किल रेट में बढ़ोतरी की गई थी। अब एक बार फिर रेखा सरकार ने प्रॉपर्टी के सरकारी मूल्य (सर्किल रेट) वास्तविक बाजार की कीमत के बराबर लाने का प्लान तैयार किया है।
दरअसल, दिल्ली के कई इलाकों में नोटिफाइड रेट और मार्केट रेट के बीच भारी अंतर है। इसकी वजह से सरकार को रेवेन्यू में भारी नुकसान हो रहा है। इसी वजह से अब नई कैटेगरी, लोकेशन के हिसाब से रेट तय करने और फार्महाउस की कीमतों को रिवाइज करने जैसे बड़े बदलावों की कवायद की जा रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जून में एक कमेटी बनाई थी, जिसकी अगुवाई डिविजनल कमिश्नर कर रहे हैं। यह कमेटी देख रही है कि किन इलाकों के सर्किल रेट बढ़ाए जाएं और कहां कम किए जाएं? यह पूरी रिपोर्ट सीएम रेखा गुप्ता के पास भेजने से पहले इसमें जनता की राय भी शामिल की जानी है। ताकि बदलाव जमीनी स्तर पर लागू हो सके।
अभी दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में A से H तक आठ कैटेगरी में सर्किल रेट को बांट रखा है। सबसे ऊंची कैटेगरी A में रेट लगभग 7.74 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर हैं और सबसे निचली H कैटेगरी में यह रेट करीब 23,280 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, लेकिन अब जो समस्या सामने आ रही है वो ये है कि एक ही कैटेगरी में आने वाले इलाकों में कहीं बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर है तो कहीं सुविधाएं कम हैं। ऐसे में जहां सुविधाएं हैं, वहां प्रॉपर्टी की असल मार्केट वैल्यू तो ज्यादा है ही, लेकिन जहां सुविधाएं कम हैं या फिर न के बराबर हैं, वहां के रेट भी ज्यादा हैं। गोल्फ लिंक्स और कालिंदी कॉलोनी इसके उदाहरण हैं। दोनों A कैटेगरी में हैं, लेकिन दोनों इलाकों की मार्केट वैल्यू और रहन-सहन की स्थिति अलग है। इसी वजह से अब लोकेशन आधारित नई समीक्षा आवश्यक मानी जा रही है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार प्रीमियम इलाकों-खासकर लुटियंस दिल्ली-के लिए एक अलग A+ कैटेगरी बनाने की तैयारी में है। इन इलाकों की मार्केट कीमतें बहुत ज्यादा हैं, लेकिन सरकारी सर्किल रेट अभी भी A कैटेगरी में ही फंसे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, राजधानी में नोटिफाइड रेट और वास्तविक ट्रांजेक्शन वैल्यू के बीच सबसे बड़ा अंतर इन्हीं इलाकों में देखा जाता है। नई कैटेगरी बनने से इन क्षेत्रों के इवैल्युएशन में पारदर्शिता आएगी और सरकारी रेवेन्यू का नुकसान भी कम होगा।
दिल्ली के कुछ शहरी इलाकों में बहुत महंगे फार्महाउस बने हैं, लेकिन उनकी कीमत अभी भी खेती की जमीन के रेट के हिसाब से तय होती है। इससे उनकी मार्केट वैल्यू और सरकारी रेट में बहुत बड़ा फर्क आता है। नए प्रस्ताव में कहा गया है कि फार्महाउस का सर्किल रेट अब उनकी लोकेशन और उनकी असली मार्केट वैल्यू के अनुसार तय की जाए। इससे पुराने कृषि वैल्यूएशन मॉडल को हटाया जा सकेगा। दिल्ली की कई पॉश कॉलोनियों में सर्किल रेट मार्केट प्राइस से बहुत कम है। ऐसे में प्रॉपर्टी के प्राइस कागजों में कम दिखाए जाते हैं और बाकी राशि कैश में दी जाती है। इससे स्टाम्प ड्यूटी कलेक्शन प्रभावित होता है। वहीं कुछ जगहों पर सर्किल रेट मार्केट वैल्यू से ज्यादा हैं, जिन्हें कम किया जा सकता है।
दिल्ली में नए सर्किल रेट लागू होने से सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होगा, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं ठीक-ठाक हैं। इसके बाद सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होने के साथ काले धन पर लगाम लगेगी। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं की कमी है, वहां जमीनों के रेट कम हो सकते हैं। दरअसल, सर्किल रेट बढ़ने से सरकार को स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में ज्यादा राजस्व मिलता है। काला धन कम होता है और रियल एस्टेट सेक्टर की रिपोर्टेड वैल्यू बढ़ती है, जबकि जमीन या मकान मालिक को उनकी संपत्ति की आधिकारिक कीमत बढ़ने से उनका रेट अच्छा मिलता है। यानी बाजार में उस जमीन या मकान का रेट बढ़ जाता है। इसका एक और फायदा ये है कि संबंधित संपत्ति के मालिक को बैंक से ज्यादा लोन लेने में आसानी होती है। जिससे उनकी कुल नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी होती है।
Updated on:
24 Nov 2025 08:45 pm
Published on:
24 Nov 2025 08:43 pm
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