
रिश्वतखोरी में एमसीडी के जेई समेत तीन लोग दोषी करार।
CBI Bribery Case: राष्ट्रीय राजधानी में एक युवक से घर बनाने के एवज में रिश्वत मांगने वाले एमसीडी के जेई समेत तीन लोगों पर अदालत में दोष सिद्ध हो गया है। अब पांच जनवरी को तीनों के खिलाफ अदालत में सजा का ऐलान होगा। यह मामला साल 2024 का है, जब एक शिकायतकर्ता ने एमसीडी के जेई रमेश चंद्र जैन समेत तीन लोगों पर घर बनाने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। सीबीआई ने रिश्वत की रकम समेत आरोपी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद यह मामला दिल्ली की विशेष अदालत में विचाराधीन था। विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि तीनों दोषियों का दोष सिद्ध हो चुका है।
दरअसल, साल 2024 में सीबीआई ने दिल्ली निवासी अरुण कुमार गुप्ता की शिकायत पर रिश्वतखोरी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस मामले में शिकायतकर्ता अरुण कुमार गुप्ता का कहना था कि वह एमसीडी के जेई के पास घर बनवाने की अनुमति मांगने पहुंचे थे। इस दौरान एमसीडी के जेई रमेश चंद्र जैन ने उनसे घर बनवाने के बदले रिश्वत मांगी। साथ ही ये धमकी भी दी कि यदि रिश्वत नहीं दी गई तो वह घर गिरवा देंगे। इस मामले में सीबीआई ने मामला दर्ज किया और शिकायतकर्ता के साथ आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई।
योजना के अनुसार, शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के लिए हामी भर दी। इसके बाद जेई रमेश चंद्र जैन ने सुरेंद्र कुमार शर्मा नाम के आदमी को एमसीडी का अधिकारी बताकर शिकायतकर्ता के पास भेजा, जहां रिश्वत लेते ही सीबीआई ने सुरेंद्र कुमार शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामला विशेष अदालत में पहुंचा। जहां सीबीआई ने तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की। इसमें एमसीडी के जेई रमेश चंद्र जैन, फर्जी एमसीडी अधिकारी सुरेंद्र कुमार शर्मा और सुरेंद्र कुमार जांगड़ा का नाम शामिल था। सुरेंद्र कुमार जांगड़ा एमसीडी में जेई रमेश चंद्र जैन का पूर्व सहायक था।
यह मामला दिल्ली की विशेष अदालत में विचाराधीन था, जहां 24 दिसंबर को विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने फैसला सुनाया। इस दौरान विशेष न्यायााधीश ने कहा "एमसीडी जेई रमेश चंद्र जैन को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत दोषी पाया गया। यहां बता दें, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 लोक सेवक को रिश्वत लेने और देने के अपराध से संबंधित है, जबकि भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित है। सीबीआई ने इन्हीं धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट फाइल की थी।
अदालत ने आगे कहा "रमेश चंद्र जैन दिल्ली नगर निगम (MCD) में बतौर जूनियर इंजीनियर तैनात थे। इस मामले में दूसरा आरोपी सुरेंद्र कुमार जांगड़ा रमेश जैन का पूर्व सहयोगी था, जबकि तीसरा आरोपी सुरेंद्र कुमार शर्मा फर्जी एमसीडी अधिकारी बनकर 18 मार्च 2024 को पीड़ित से रिश्वत लेने पहुंचा था, जिसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया था।" अदालत ने ये भी दोहराया कि जब पीड़ित अरुण गुप्ता ने जेई रमेश जैन को रिश्वत देने से इनकार किया तो उसे धमकी भी दी गई कि पैसा नहीं देने पर उसका घर गिराया जाएगा। यह बात भी अदालत में साबित हो चुकी है।
इस मामले में फैसला सुनाते हुए दिल्ली की विशेष अदालत ने कहा कि सीबीआई ने कोर्ट में पर्याप्त सबूत पेश किए। इन सबूतों से पता चलता है कि सुरेंद्र कुमार शर्मा और सुरेंद्र कुमार जांगड़ा ने पीड़ित से रिश्वत की रकम मांगी थी। यह रिश्वत की रकम लेते हुए सुरेंद्र कुमार शर्मा रंगे हाथों पकड़े गए। शर्मा के पास ही रिश्वत की रकम बरामद हुई। अन्य सबूतों से पता चलता है कि इस मामले में एमसीडी के जेई रमेश चंद्र जैन मुख्य भूमिका में थे। रकम बरामदगी, रासायनिक पुष्टि और स्वतंत्र गवाही से तीनों का अपराध अभियोजन पक्ष ने साबित किया।
इस मामले में बचाव पक्ष ने मामले को मनगढ़ंत और गवाहों को झूठा बताया था, लेकिन अदालत ने सभी दलीलें खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि सभी गवाहों के बयान स्पष्ट हैं और सबूत भी पर्याप्त हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी मजबूत हैं। ऐसे में किसी भी तरह से मामला मनगढ़ंत कहानियों पर आधारित नहीं है। विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने कहा कोर्ट को सुनवाई के दौरान रिश्वत मांगने और रकम लेने के पर्याप्त सबूत मिले हैं। ऐसे में तीनों आरोपियों का दोष साबित हो जाता है। अब इस मामले में पांच जनवरी को सजा का ऐलान किया जाएगा।
Updated on:
2 Jan 2026, 5:08 PM IST
Published on:
2 Jan 2026, 5:08 PM IST
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