
दिल्ली हाईकोर्ट ने शाही जामा मस्जिद के आसपास अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया।
Delhi Bulldozer Action: राष्ट्रीय राजधानी में तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान भीड़ उग्र हो गई थी। इस दौरान भीड़ में शामिल शरारती तत्वों ने एमसीडी और पुलिस पर पथराव कर दिया था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस टीम की मदद से अब तक करीब तीन दर्जन लोगों की पहचान की है। इसमें समाजवादी पार्टी का एक सांसद भी शामिल है। हालांकि सपा सांसद की पत्थरबाजी मामले में कितनी संलिप्तता है, ये जांच के बाद ही पता चलेगा। इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने अवैध अतिक्रमण पर सख्त रुख दिखाते हुए एक और बड़ी बुलडोजर कार्रवाई का आदेश दिया है। इससे पहले एमसीडी मौके का सर्वे कराकर हाईकोर्ट में रिपोर्ट सौंपेगी।
दरअसल, दिल्ली में तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण पर बुलडोजर एक्शन के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी को नया आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली की शाही जामा मस्जिद के आसपास से अतिक्रमण हटाने के लिए सर्वे किया जाए। इसमें एमसीडी पार्क और सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण पर विशेष फोकस रखने के लिए कहा गया है। एमसीडी को यह सर्वे दो महीने के अंदर पूरा करके इसकी रिपोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट में जमा करनी है। इस रिपोर्ट में अगर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण पाया जाएगा तो दिल्ली हाईकोर्ट बुलडोजर एक्शन का निर्देश देगा।
दिल्ली हाईकोर्ट जामा मस्जिद के आसपास अतिक्रमण पर यूं ही एक्टिव नहीं हुआ है। इस मामले में फरहत हसन नाम के एक आदमी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इस याचिका में कहा गया कि शाही जामा मस्जिद के पास अवैध पार्किंग से जाम की समस्या होती है। इसलिए यह अवैध पार्किंग हटवाई जाए। इसके अलावा शाही जामा मस्जिद के सार्वजनिक रास्ते में अवैध तरीके से कब्जा जमाकर बैठे फेरी और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी हटाया जाए। इसपर दिल्ली हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए एमसीडी को आदेश दिया कि शाही जामा मस्जिद के आसपास सर्वे करवाकर दो महीनों में रिपोर्ट प्रेषित करें। इस याचिका में शाही जामा मस्जिद के आसपास चल रहे तमाम व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी रोक लगाने की मांग की गई है।
दिल्ली की फैज-ए-इलाही मस्जिद रामलीला मैदान इलाके में है। बीते दिन नगर निगम यानी एमसीडी ने यहां किए गए अवैध निर्माण को हटाने के लिए अतिक्रमण पर बुलडोजर चलवा दिया। छह और सात जनवरी की रात में हुई कार्रवाई एक दिन की कार्रवाई नहीं थी। दिल्ली हाईकोर्ट से आदेश मिलने के बाद सबसे पहले एमसीडी और पुलिस ने मस्जिद के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों को इस कार्रवाई की जानकारी देकर नोटिस दिया था। यहां करीब 36000 स्क्वायर फीट सरकारी जमीन में अवैध कब्जा मिला था। एमसीडी ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए बारात घर और डिस्पेंसरी जैसी इमारतों पर बुलडोजर चलवा दिया।
दिल्ली पुलिस और एमसीडी सूत्रों की मानें तो कार्रवाई से पहले स्थानीय लोगों के साथ संवाद कर उन्हें आश्वस्त किया था कि सिर्फ अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा। स्थानीय लोग इस पर सहमत भी थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि मस्जिद आधिकारिक जमीन पर स्थित है। इसलिए मुख्य धार्मिक ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। इसके बावजूद कुछ शरारती तत्वों ने मस्जिद विध्वंस की अफवाह फैलाकर लोगों को उकसा दिया। गलतफहमी के चलते आधी रात को सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए। भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हुई पत्थरबाजी के बाद पुलिस ने कई नामजद और अज्ञात लोगों पर सरकारी काम में बाधा डालने और उपद्रव की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसके साथ ही कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस उपद्रवियों की पहचान के लिए बॉडी कैमरों और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर रही है। इस हिंसा का राजनीति कनेक्शन भी सामने आया है। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। दिल्ली भाजपा का कहना है कि उत्तर प्रदेश के रामपुर से सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी मौके पर पाए गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
Published on:
08 Jan 2026 03:19 pm
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