
एमसीडी हेडक्वार्टर।
दिल्ली की तीनों लैंडफिल साइटों - भलस्वा, गाजीपुर और ओखला साइटों पर हर दिन राजधानी से लाखों टन कचरा पहुंचता है। सही तरीके से वेस्ट मैनेजमेंट को न अपनाने की प्रणाली की वजह से तीनों लैंडफिल साइटों पर कई फीट ऊंचे कूड़े के पहाड़ स्थापित हो गए हैं। वहीं, दिल्ली नगर निगम की तरफ से बीते कुछ सालों में इन तीनों लैंडफिल साइटों के कूड़े के पहाड़ को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। एमसीडी ने नई तकनीक को अपनाकर भी कूड़े के पहाड़ को कम करने की कवायद शुरू कर दी है। वहीं, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 18 महीनों में लैंडफिल साइट के कूड़े के पहाड़ को खत्म कर दिया जाए।
उन्होंने गाजीपुर लैंडफिल साइट का अचानक निरीक्षण किया। उनके साथ दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार, एमसीडी कमिश्नर ज्ञानेश भारती और एमसीडी स्पेशल ऑफिसर अश्विनी कुमार भी उपस्थित थे। उपराज्यपाल ने इस निरीक्षण से कूड़े के पहाड़ को कम करने के लिए चलाए जा रहे कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने जानकारी दी कि मेरी पिछली यात्रा के बाद स्थापित नई ट्रॉमेल मशीनें प्रतिदिन 10 किलो मीट्रिक टन कचरा संसाधित कर रही हैं।
एमसीडी ट्रॉमेल मशीनों से कम कर रही कूड़े के पहाड़
एमसीडी की तरफ से तीनों लैंडफिल साइट - भलस्वा, गाजीपुर और ओखला साइटों के कूड़े के पहाड़ की ऊंचाई को कम करने का काम किया जा रहा है। जुलाई के पहले हफ्ते में दिल्ली नगर निगम ने जानकारी देते हुए दावा किया था कि कूड़े की ऊंचाई को कम किया गया। निगम के कूड़े के पहाड़ को पूरी तरह से हटाने के लिए दो से तीन वर्ष का लक्ष्य रखा है। निगम के अनुसार इन भलस्वा लैंडफिल साइट पर कचरे को हटाने के लिए 44 ट्रॉमेल मशीन लगाई हैं। यह प्रतिदिन 9 हजार से 10 हजार टन कचरे को हटा रही हैं। इससे अब तक करीब 25 लाख टन कचरे को हटाकर 11 मीटर ऊंचा ढेर कम हुआ है। इस साइट पर अन्य 12 मीटर के कूड़े के ढेर को हटाने का काम जारी है।
ओखला और गाजीपुर लैंडफिल साइट की ऊंचाई भी कम हुई
वहीं, एमसीडी की तरफ से बताया गया है कि अब तक ओखला लैंडफिल साइट पर 26 ट्रॉमेल मशीन हर दिन 7 हजार टन कचरे को हटा रही हैं। निगम का दावा है कि इस साइट पर अब तक 17 लाख टन कचरे को हटाकर कूड़े के ढेर की ऊंचाई को 15 से 30 मीटर तक कम किया गया है। इसी तरह गाजीपुर स्थित लैंडफिल साइट पर 10 ट्रॉमेल मशीन लगाई गई हैं, यह प्रतिदिन 4 हजार टन कूड़े को हटा रही हैं। अब तक 11 लाख टन कचरे को हटाया जा चुका है। निगम का दावा है कि इस लैंडफिल साइट की ऊंचाई के कुछ हिस्सों में 12 से 18 मीटर तक कम हुई है।
घरों से ही अलग-अलग करें सूखे व गीले कचरा
वहीं, एमसीडी ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि वह अपने घरों पर ही कचरे को अलग-अलग करें। गीले कूड़े को खाद बनाने के लिए भेजे और सूखा कूड़ा ही लैंडफिल पर भेजें। जिससे भविष्य में मौजूदा परिस्थिति का सामना न करना पड़े जैसे अभी लैंडफिल साइटों पर नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार इन साइटों पर आए दिन आग लगने की घटना होती हैं। इससे काफी प्रदूषण भी इलाके में फैलता है और लोगों को दिक्कतें होती हैं। लोगों को लैंडफिल साइटों में आग लगने की घटना से सांस लेने में भी दिक्कतें होती हैं।
Published on:
24 Jul 2022 05:19 pm
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