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राजनीतिक बयानबाजी करें मर्यादा ना तोड़ें…सीएम और मंत्रियों के महंगे फोन पर AAP-BJP में सियासी बवाल

Delhi Politics: दिल्ली सामान्य प्रशासन विभाग ने सीएम और मंत्रियों के लिए मोबाइल फोन खरीदने की सीमा में संशोधन किया है। इसको लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर हमला बोला। अब भाजपा ने इसपर पलटवार किया है।

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Delhi Politics: राजनीतिक बयानबाजी करें मर्यादा ना तोड़ें...सीएम और मंत्रियों के महंगे फोन पर AAP-BJP में सियासी बवाल

दिल्ली की सीएम और मंत्रियों के महंगे गैजेट्स पर सियासी पारा हाई हो गया है।

Delhi Politics: दिल्ली में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लिए फोन खरीदने की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी को लेकर सियासत गरमा गई है। इसपर आम आदमी पार्टी ने जहां दिल्ली सरकार पर जनता की समस्याओं पर तेजी नहीं दिखाने और अपने लिए खजाना खोलने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा ने आम आदमी पार्टी को साल 2015 और 2022 में तत्कालीन अरविंद केजरीवाल सरकार की याद दिलाते हुए करारा पलटवार किया है। राजनीतिक‌ विश्लेषक इसे आम आदमी पार्टी के नहले पर भाजपा का दहला मान रहे हैं।

पहले समझिए क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पिछले 9 जुलाई को दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक नियम में संशोधन किया। इसके अनुसार, अब दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपने लिए डेढ़ लाख का मोबाइल फोन खरीद सकती हैं। जबकि दिल्ली सरकार के मंत्रियों के लिए यह सीमा सवा लाख रुपये है। दिल्ली सरकार के अधिकारियों का कहना है कि फोन प्रतिपूर्ति की यह सीमा 12 साल बाद संशोधित की गई है। पहले यह सीमा लगभग 50 हजार रुपये थी। साल 2013 में इसे बदला गया था। इसको लेकर दिल्ली की भाजपा सरकार और आम आदमी पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

आम आदमी पार्टी ने क्या कहा?

आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के दौरान महिलाओं को किए गए वादों को दरकिनार कर भाजपा नेता खुद के लिए महंगे गैजेट खरीदने में व्यस्त हैं। AAP नेता और दिल्ली के संयोजक सौरभ भारद्वाज ने अपने X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर लिखा "भाजपा ने 8 मार्च 2025 से लाखों महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन अब तक एक भी रुपया नहीं दिया गया है। जब बात 1.5 लाख रुपये के फोन खरीदने या अपने लिए असीमित बिल पास करवाने की आती है तो भाजपा फुर्ती से काम करती है। लेकिन जब महिलाओं की बात आती है तो वे 'कमेटियों की जांच' के पीछे छिप जाते हैं।"

उन्होंने सवाल उठाते हुए आगे कहा "अगर सरकार रातोंरात महंगे मोबाइल फोन की मंज़ूरी दे सकती है तो क्या एक समिति नहीं बना सकती कि कौन मंत्री कौन-सा फोन ले। इसका कितना बिल हो और मुख्यमंत्री को क्या सुविधाएं मिलें? कमेटियां सिर्फ आम जनता के अधिकारों को टालने के लिए ही क्यों बनाई जाती हैं?"

भाजपा ने किया पलटवार

AAP की टिप्पणी का जवाब देते हुए दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने एक आरटीआई के जवाब की प्रति साझा कर आम आदमी पार्टी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा "अब जबकि मुख्यमंत्री द्वारा उपयोग किए जा रहे लाखों रुपये के फोन पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो बेहतर होगा कि 2015 से 2022 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए खरीदे गए मोबाइल फोनों की जानकारी भी देख ली जाए।"

कपूर ने यह भी आरोप लगाया कि उस दौरान केजरीवाल के लिए 1.35 करोड़ रुपये की कारें खरीदी गई थीं। उन्होंने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "क्या आप इस पर भी कुछ कहेंगे कि उस समय मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए 1.45 करोड़ रुपये की गाड़ियां खरीदी गईं थीं? जबकि हम जैसे आम नागरिक बैंक से ऋण लेकर 7–8 लाख रुपये की कारों में यात्रा करते हैं। राजनीतिक बयानबाजी करें, लेकिन शालीनता और मर्यादा की सीमाएं न लांघें।"

दिल्ली के अधिकारियों ने क्या बताया?

एक वरिष्ठ अधिकारी ने HT को बताया "दिल्ली में फोन प्रतिपूर्ति की सीमा पहले 50,000 रुपये थी, लेकिन पिछली AAP सरकार में सीएम और मंत्रियों ने महंगे आईफोन खरीदे थे। जिनकी कीमत एक लाख रुपये से ऊपर यानी सरकार द्वारा तय किए गए प्रतिपूर्ति भत्ते से ज्यादा थी। इसी आधार पर अब सामान्य प्रशासन विभाग ने सीएम और मंत्रियों के लिए मौजूदा बाजार कीमत और मूल्य पर फोन सेट खरीदने के लिए नियम में संशोधन किया है।"


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