10 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

LPG Shortage Delhi: दिल्ली में फिर लौटा स्टोव का दौर, ₹30,000 के पार पहुंची कीमतें

Sadar Bazar Stove Market: राजधानी दिल्ली में एलपीजी की किल्लत ने एक दशक से भी पुराने दौर को वापस ला दिया है। दिल्ली के प्रसिद्ध सदर बाजार में लगभग 14 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद केरोसिन स्टोव की बिक्री में भारी उछाल दर्ज किया गया है। रसोई गैस की कमी के चलते खासकर ढाबा संचालक और कैटरिंग कारोबारियों के बीच इसकी मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है, जो विकल्प के तौर पर अब पारंपरिक स्टोव का सहारा ले रहे हैं।

3 min read
Google source verification
delhi sadar bazar k1erosene stove demand lpg shortage

फोटो AI

Cooking Gas Crisis: दिल्ली के बड़े बाजार, सदर बाजार में करीब 14 साल बाद एक बार फिर मिट्टी के तेल (केरोसिन) वाले स्टोव की वापसी हुई है। रसोई गैस LPG की भारी कमी के कारण अब दुकानों पर ये स्टोव फिर से बिकने लगे हैं। दुकानदारों का कहना है कि पहले कोई इन्हें पूछता भी नहीं था, लेकिन अब इनकी बिक्री बहुत ज्यादा बढ़ गई है। सिर्फ स्टोव ही नहीं, बल्कि डीजल से चलने वाले चूल्हों की भी काफी डिमांड है। सबसे ज्यादा फायदा ढाबा चलाने वालों और कैटरिंग का काम करने वालों को हो रहा है, क्योंकि उन्हें खाना पकाने के लिए बड़े गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं।

इस बदलाव की एक बड़ी वजह सरकार का फैसला भी है। गैस की किल्लत को देखते हुए सरकार ने मिट्टी का तेल बेचने के नियमों में ढील दे दी है, ताकि लोगों को खाना पकाने में आसानी हो सके। इसी वजह से अब बाजार में फिर से पुराने दिनों की तरह स्टोव और चूल्हे दिखाई देने लगे हैं।

एलपीजी संकट से पुराने दिन वापस लौटे

दिल्ली व्यापार महासंघ के अध्यक्ष देवराज बवेजा के अनुसार, वर्ष 2012 में दिल्ली को केराेसिन मुक्त शहर अभियान के तहत तब सरकार ने दो लाख परिवारों को निश्शुल्क एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए थे। वैसे, इसके पहले से ही बिक्री घटने लगी थी। जबकि, सरकार के अभियान के बाद बिक्री पूरी तरह से थम गई। अब एलपीजी संकट से पुराने दिन वापस लौटे हैं। किसी समय सदर बाजार में स्टोव और लालटेन के कई विक्रेता व निर्माता थे। तब यह केरोसिन स्टोव मामले में पूरे देश का गढ़ था।

30 हजार रुपये तक में बिक रहा स्टोव

जैसे-जैसे रसोई गैस LPG घर-घर पहुंची, लोगों ने मिट्टी के तेल वाले स्टोव का इस्तेमाल बंद कर दिया था। लेकिन अब दुनिया भर में चल रहे युद्ध के हालातों की वजह से गैस की कमी होने लगी है, जिससे पुराने जमाने के केरोसिन स्टोव और डीजल चूल्हे एक बार फिर बाजारों में लौट आए हैं। हालांकि, मांग बढ़ते ही इनके दाम भी आसमान छूने लगे हैं। जो स्टोव पहले मात्र 400 रुपये में मिल जाता था, अब उसकी कीमत 1,800 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, 8-9 हजार रुपये में मिलने वाला डीजल स्टोव अब 30 हजार रुपये तक में बिक रहा है।

स्टोव का कबाड़ा तक विक गया

सदर बाजार की गली लल्लू मिश्रा, कुतुब रोड और गांधी मार्केट में स्टोव और लालटेन के कारोबारी गिनती के है। बहुत से ट्रेडर्स केरोसिन स्टोव का बिजनेस छोड़कर एलपीजी बर्नर के व्यापार में शिफ्ट हो गए। अब किसी के पास स्टोव नहीं है। स्टोव का कबाड़ा तक विक गया है। वैसे, अभी केरोसिन की उपलब्धता को लेकर असमंजस की स्थिति है। क्योंकि, सरकार ने उसकी बिक्री के लिए पेट्रोल पंपों को अधिकृत किया है, लेकिन वहां अभी पेट्रोलियम कंपनियों ने केरोसिन उपलब्ध नहीं कराया है। इस बीच, डीजल से चलने वाले चूल्हे भी बाजार में छाए हुए हैं, जिनकी मांग मुख्य तौर पर कैटरिंग व ढाबे वालों की ओर से हो रही है। केरोसिन स्टोव व डीजल चूल्हा बेच रहे सुशील मित्तल ने बताया कि जब से रसोई गैस की किल्लत पैदा हुई है। तब से मांग बढ़ी है और ये बाजार में लौटे हैं।

दिल्ली करीब 30 वर्ष पूर्व केरोसिन मुक्त हुई थी

बाजार में वैसे तो लोहे, पीतल और बत्ती वाले कई तरह के केरोसिन स्टोव आते हैं, लेकिन इस वक्त दुकानों पर ज्यादातर लोहे वाले स्टोव ही बिक रहे हैं। व्यापारी देवराज बावेजा के अनुसार, स्टोव हमेशा से कम आय वाले वर्ग की जरूरत रहा है। अब जब गैस सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है, तो मजदूर वर्ग ने दोबारा स्टोव पर खाना पकाना शुरू कर दिया है। बाजार में घरों के लिए छोटे स्टोव के साथ-साथ ढाबों के लिए बड़े डीजल और केरोसिन चूल्हे भी उपलब्ध हैं।

तेल की कीमत 80 से 85 रुपये हो सकती है

दूसरी ओर, सरकार ने पेट्रोल पंपों से मिट्टी का तेल (केरोसिन) बेचने की मंजूरी तो दे दी है, लेकिन असलियत में यह अभी पंपों पर मिल नहीं रहा है। पंप मालिकों का कहना है कि तेल कंपनियों ने अभी तक इसकी सप्लाई के लिए कोई इंतजाम नहीं किया है। वैसे, जब यह उपलब्ध होंगे तो उसकी कीमत बाजार मूल्य में 80 से 85 रुपये हो सकती है। दिल्ली करीब 30 वर्ष पूर्व केरोसिन मुक्त हुई थी। अब जबकि, सरकार ने बिक्री की अनुमति दी है तो ढाबे व रेस्तरां के साथ स्ट्रीट फूड वेंडर्स इसे उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं।

दुकानों पर लौटा स्टोव

इसी तरह, चाय, समोसे की दुकानों पर स्टोव व डीजल वाले चूल्हे लौटने लगे हैं। एक दुकानदार संजय के अनुसार, एलपीजी सिलिंडर नहीं मिल रहा है। ऐसे में डीजल आधारित स्टोव का प्रयोग कर रहे हैं। वैसे, डीजल से जलाना महंगा पड़ रहा है।