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दिल्ली यूनिवर्सिटी में साहित्यिक चोरी: एक शिक्षक का PhD डेटा दूसरे फैकल्टी मेंबर की थीसिस में मिलने से हड़कंप

DU PhD Controversy: दिल्ली यूनिवर्सिटी में पीएचडी रिसर्च को लेकर बड़ा बवाल हो गया है। एक प्रोफेसर का आरोप है कि उनकी सालों पुरानी रिसर्च का हिस्सा किसी दूसरे की थीसिस में बिना क्रेडिट दिए इस्तेमाल कर लिया गया। शिकायत मिलते ही यूनिवर्सिटी ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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DU Thesis Copy Dispute

दिल्ली यूनिवर्सिटी रिसर्च विवाद photo ani

DU PhD Thesis Plagiarism Controversy: दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक PhD रिसर्च को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज के एक प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि उनकी सालों की मेहनत, रिसर्च कंटेंट और निष्कर्षों को एक दूसरे प्रोफेसर ने अपनी PhD थीसिस में चुरा लिया और उन्हें कोई क्रेडिट या रेफरेंस भी नहीं दिया। शिकायत दर्ज होने के बाद अब यूनिवर्सिटी प्रशासन इस पूरे मामले की जांच में जुट गया है।

राजस्थान की ढूंढाड़ी भाषा सीखी ताकि इतिहास को समझ सके

राजस्थान के व्यापारिक इतिहास और जयपुर के विकास पर सालों मेहनत करने वाले एक प्रोफेसर इस समय काफी परेशान हैं। उन्होंने 1990 के दशक में बकायदा राजस्थान की ढूंढाड़ी भाषा सीखी, ताकि इतिहास को गहराई से समझ सकें। सालों की जमीनी रिसर्च के बाद साल 2006 में उन्हें PhD की डिग्री मिली थी। प्रोफेसर का कहना है कि पिछले साल जब उन्होंने किसी दूसरे स्कॉलर की PhD थीसिस देखी, तो उनके होश उड़ गए। उसमें उनकी अपनी बरसों की मेहनत का एक बड़ा हिस्सा हूबहू छपा हुआ था।

टर्निटिन की रिपोर्ट में 38 फीसदी कंटेंट हूबहू

जानकारी के मुताबिक, शिक्षक ने दूसरे की थीसिस को खुद के कंटेंट से मिलता-जुलता पाया तो विश्वविद्यालय को इस बारे में बताते हुए जांच करने की बात कही। इसके बाद विश्वविद्यालय द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्लेजरिज्म जांच सॉफ्टवेयर टर्निटिन की रिपोर्ट में सामने आया है कि उनकी थीसिस का 38 प्रतिशत कंटेंट दूसरे शिक्षक की रिसर्च से मिलता है। इस पर शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह कंटेंट का इस्तेमाल बिना किसी अनुमति, क्रेडिट के किया गया है।

विश्वविद्यालय ने किया जांच समिति का गठन

मामले की शिकायत के बाद यह विवाद विश्वविद्यालय प्रशासन, इतिहास विभाग, रिसर्च काउंसिल और UGC तक पहुंच गया। इस पर इतिहास विभाग ने शैक्षणिक ईमानदारी के लिए समिति का बनाने की बात कही है। अब समिति इस मामले की जांच करने के बाद रिपोर्ट तैयार करेगी। शिकायतकर्ता ने कुलपति से भी कार्रवाई की मांग की है।

दूसरे पक्ष ने आरोपों को बताया गलत

बता दें कि जिस शिक्षक पर रिसर्च चोरी के आरोप लगे हैं, उन्होंने सभी आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि मैंने अपनी रिसर्च में किसी भी तरह की चोरी नहीं की है। मामला अभी भी विश्वविद्यालय की समिति के पास है। शिकायतकर्ता पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर मानसिक रूप से परेशान करने की साजिश है।