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नारी शक्ति वंदन और परिसीमन पर तेजी से आगे बढ़ने की तैयारी

केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नारी शक्ति वंदन अधिनियम के क्रियान्वयन तथा परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर गंभीरता से काम कर रही हैं। शीर्ष सरकारी और पार्टी सूत्रों के अनुसार, जैसे ही संसद में आवश्यक संख्या बल की स्थिति अनुकूल होगी, इन दोनों मुद्दों को आगे बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा सकते हैं

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Nari Shakti Vandan

नई दिल्ली। केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नारी शक्ति वंदन अधिनियम के क्रियान्वयन तथा परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर गंभीरता से काम कर रही हैं। शीर्ष सरकारी और पार्टी सूत्रों के अनुसार, जैसे ही संसद में आवश्यक संख्या बल की स्थिति अनुकूल होगी, इन दोनों मुद्दों को आगे बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा सकते हैं।

सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र के अनुसार, “जैसे ही आवश्यक संख्या और परिस्थितियां अनुकूल होंगी, सरकार इस विषय को संसद में आगे बढ़ाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विशेष सत्र बुलाने से भी परहेज नहीं किया जाएगा। उन्होंने मानसून सत्र में इसे लाने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया।” सूत्रों के अनुसार आवश्यकतानुसार इन दोनों विषयों को अलग-अलग करके भी आगे बढ़ा जा सकता है। वहीं सरकार जनगणना से जुड़े कार्यों की प्रगति से भी संतुष्ट है और मानती है कि आगे की संवैधानिक प्रक्रियाओं के लिए इससे आवश्यक आधार तैयार किया जा रहा है।

इधर भाजपा के एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि परिसीमन और नारी शक्ति वंदन अधिनियम पार्टी और सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार, देश का संसदीय प्रतिनिधित्व लंबे समय से 1971 की जनसंख्या के आधार पर तय व्यवस्था के प्रभाव में रहा है, जबकि पिछले पांच दशकों में देश की जनसांख्यिकीय और सामाजिक तस्वीर में व्यापक बदलाव आया है। सूत्र ने कहा, “भारत तेजी से बदल रहा है। ऐसे में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को भी बदलती जनसंख्या और नए सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप ढालना आवश्यक है।

बदले दृश्य के अनुसार रणनीति की तैयारी

पार्टी के भीतर यह आकलन है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लागू होने और परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ने से भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इन दोनों से लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की संरचना के साथ-साथ राजनीतिक नेतृत्व की सामाजिक संरचना में भी व्यापक परिवर्तन होगा। जिसका लाभ जेन-जी और युवा नेतृत्व के लिए राजनीतिक भागीदारी के नए अवसर पैदा होने के रूप में होगा।

डीएमके-टीएमसी के साथ अन्य संभावनाओं की भी तलाश

सूत्रों के अऩुसार बजट सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन बिल पर डीएमके के शीर्ष नेतृत्व से बात भी हो गई थी। लेकिन तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों में डीएमके का साथ सदन में नहीं मिल पाया था। पहले की सहमति अब फलीभूत हो सकती है। परिसीमन के आनुपातिक फार्मूले को दक्षिणी राज्यों के लिए हितकारी बताया जा कर उन्हें साथ लेने के प्रयास हैं। वहीं टीएमसी में टूट के बाद नए धड़े के समर्थन की भी उम्मीद है। अब रणनीतिकार इसके बाद दो तिहाई बहुमत के लिए और आवश्यक संख्याबल पूरा करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसके लिए महाराष्ट्र के विपक्षी खेमे को भी टटोला जा रहा है और शिवसेना(यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि भाजपा के किसी भी नेता ने इस तरह की संभावनाओं पर टिप्पणी से इनकार किया है।