
विरोध के बावजूद जीईएसी ने जीएम सरसों का रास्ता खोला
नई दिल्ली. जेनेटिकली मोडिफाइड अप्रेजल कमेटी (जीईएसी) ने जीएम सरसों की डीएमएच (धारा मस्टर्ड हाइब्रिड)-11 किस्म को चार साल के लिए एनवायरमेंटल रिलीज की सिफारिश कर दी है। देश में पहली बार किसी जीएम खाद्यान्न फसल को ऐसी मंजूरी मिली है। यदि सरकार ने इस सिफारिश को मंजूर कर लिया तो देश में जीएम सरसों की व्यावसायिक खेती का रास्ता खुल जाएगा। जीईएसी की 18 अक्टूबर को हुई बैठक में यह सिफारिश की गई है।
सिफारिश के अनुसार, अगले दो साल तक जीएम सरसों के पर्यावरणीय पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। यह अध्ययन इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (आइसीएआर) के साथ मिलकर होगा। अध्ययन में देखा जाएगा कि जीएम सरसों की फसल का अन्य परागकणों और मधुमक्खियों पर क्या असर पड़ता है। इसकी रिपोर्ट जीईएसी को सौंपी जाएगी। डीएमएच-11 के विकास में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक दीपक पेंटल के अनुसार, यदि सबकुछ ठीक रहा तो किसान जीएम सरसों का उत्पादन कर सकेंगे।
माना जा रहा है कि जीएम फसलों का विरोध करने वाले समूह इस फैसले का व्यापक विरोध करेंगे। इनमें आरएसएस का आनुषांगिक संगठन स्वदेशी मंच भी शामिल है। हालांकि उन्हें ऐसी उम्मीद है कि सरकार इसे अंतिम मंजूरी नहीं देगी।
देश में सरसों की खेती
1. राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा और पंजाब में 65-70 लाख हेक्टेयर में सरसों की खेती की जाती है। करीब 60 लाख किसान सरसों उत्पादन से जुड़े हैं। वर्तमान में प्रति हेक्टेयर 1,000-1,200 किलो सरसों का उत्पादन होता है, जबकि इसका वैश्विक औसत 2,000-2,200 किलो प्रति हेक्टेयर है।
2. यह दावा किया जा रहा है कि सरसों की वर्तमान किस्मों की तुलना में जीएम सरसों से 30 फीसदी ज्यादा उत्पादन होगा। हालांकि कृषि वैज्ञानिक देवेंद्र शर्मा का कहना है कि जानबूझकर सरसों की ऐसी देशी किस्मों को अध्ययन में शामिल नहीं किया गया है जो जीएम की तुलना में ज्यादा उत्पादक हैं।
3. वर्ष 2017 में इसी तरह की मंजूरी दी गई थी, जिसे भारी विरोध के कारण वापस लेना पड़ा था। स्वदेशी जागरण मंच के अश्विनी महाजन का कहना है कि जीएम सरसों की किस्म के स्वदेशी होने का दावा गलत है। यह स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं ही है।
4. कोलिशन ऑर जीएम-फ्री इंडिया ने जीईएसी की सिफारिश पर हैरानी जताई है। कोलिशन का मानना है कि यह नियामक संगठन और जीएम फसल उत्पादकों को गठजोड़ का नतीजा है। इसके तहत बॉयोसेफ्टी के आंकलन में धोखा दिया जा रहा है।
Published on:
27 Oct 2022 11:32 pm
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