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पाक में कई साल पहले दिवंगत, अस्थियां अब पहुंचीं भारत

विसर्जन का लंबा इंतजार : विभाजन के बाद तीसरी बार पड़ोसी देश से लाए गए 400 कलश

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अमृतसर. सनातन धर्म का एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में कई साल पहले दिवंगत भारतीयों की अस्थियां लेकर भारत पहुंचा है। प्रतिनिधिमंडल अटारी-वाघा बॉर्डर से पहले दिल्ली और फिर हरिद्वार जाएगा। वहां रीति-रिवाज के साथ अस्थियों को गंगा में विसर्जित किया जाएगा। विभाजन के बाद यह तीसरा मौका है, जब हिंदुओं और सिखों की अस्थियां पाकिस्तान से भारत लाई गई हैं।प्रतिनिधिमंडल 400 लोगों की अस्थियां लेकर आया है। इनमें 350 सनातन धर्म से और 50 सिख परिवारों से हैं। अस्थियां उन लोगों की हैं, जिनकी पाकिस्तान में 2011 से अब तक मौत हुई। इनमें बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कराची के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत रामनाथ महाराज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में रहने वाले ज्यादातर हिंदू और सिख चाहते हैं कि मरने के बाद उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित की जाएं। दिल्ली के निगम घाट पर पूजा-अर्चना के बाद 21 फरवरी को अस्थियां हरिद्वार में सती घाट और गंगा में विसर्जित की जाएंगी।

वीजा नहीं मिला, अंतिम कर्मकांड में देर

रामनाथ महाराज ने बताया कि समय पर वीजा नहीं मिलने से अंतिम कर्मकांड में देर हुई। हम अस्थियों के विसर्जन के लिए वीजा नियमों में छूट चाहते हैं। प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण महल के मुताबिक भारत आए प्रतिनिधिमंडल में सात लोग शामिल हैं। इन्होंने प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में शामिल होने के लिए वीजा में विस्तार की मंजूरी मांगी है। प्रतिनिधिमंडल लखनऊ भी जाना चाहता है।

2011 और 2016 में भी आई थीं

पाकिस्तान में निधन के बाद हिंदुओं और सिखों के अस्थि कलश विभिन्न मंदिरों में रख दिए जाते हैं। कई कलश जमा होने के बाद सनातन धर्म प्रतिनिधियों की ओर से वीजा हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। रामनाथ महाराज इससे पहले 2016 में 136 और 2011 में 160 लोगों की अस्थियां लेकर भारत आए थे।