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प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीने से बढ़ सकता है रक्तचाप

ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के शोध में खुलासा

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वॉशिंगटन. बस, ट्रेन और विमान के सफर के दौरान लोग प्लास्टिक की पानी की बोतलों का इस्तेमाल करते हैं। घरों में भी इन बोतलों का इस्तेमाल आम है। एक नए शोध में पता चला है कि प्लास्टिक की बोतलों से पानी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इन बोतलों का पानी रक्तप्रवाह में प्रवेश करने वाले छोटे प्लास्टिक कणों के कारण रक्तचाप बढ़ा सकता है।न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रोप्लास्टिक्स जर्नल में प्रकाशित शोध में बताया गया कि माइक्रोप्लास्टिक खाने-पीने की कई चीजों में पाए जाते हैं। ये कण आंतों और फेफड़ों से गुजरकर रक्त और अन्य ऊतकों तक पहुंच सकते हैं। ऑस्ट्रिया में डेन्यूब प्राइवेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने शोध में प्रतिभागियों को शामिल किया। उन्होंने पाया कि जिन्होंने प्लास्टिक और कांच की बोतलों से पानी पीना बंद कर दिया और दो हफ्ते तक नल के पानी का सेवन किया, उनके रक्तचाप में काफी कमी आई।

कांच की बोतलों के पैक पदार्थों में भी...

इससे पहले एक शोध में बताया गया था कि इंसान हर हफ्ते करीब पांच ग्राम माइक्रोप्लास्टिक का सेवन करते हैं, जो एक क्रेडिट कार्ड के वजन के बराबर है। कांच की बोतलों में पैक तरल पदार्थों में भी माइक्रोप्लास्टिक पाए गए। माइक्रोप्लास्टिक दुनियाभर में चिंता का कारण बने हुए हैं। इनसे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में हृदय रोग, हार्मोन असंतुलन और कैंसर शामिल है।

खतरे से बचने के विकल्प जरूरी

शोधकर्ताओं का कहना है कि जो लोग लंबे समय से प्लास्टिक की बोलतों से पानी पी रहे हैं, उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ हो सकता है। प्लास्टिक की बोतलों के बजाय लोगों को इसके विकल्प ढूंढने चाहिए, ताकि माइक्रोप्लास्टिक के खतरों से बचा जा सके। अनजाने में निगलने पर प्लास्टिक के ये सूक्ष्म कण आंतों और फेफड़ों में सेल्स बैरियर्स तोड़ सकते हैं।