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सोनीपत में तैयार कर मेरठ में पैक हो रही थी लीवर की नकली दवाइयां! 50 हजार से अधिक…

पुलिस ने हिमालय वेलनेस के ब्रांड से नकली दवाइयां बनाने वाले गिरोह को पकड़ा है। इन दवाइयों में सोनीपत, मेरठ और गाजियाबाद कनेक्शन सामने आया है।
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नई दिल्ली

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Shivmani Tyagi

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Updated: 8 Feb 2026, 6:05 PM IST

fake medicines

पकड़े गए आरोपी ( फोटो स्रोत गाजियाबाद पुलिस )

Fake medicines गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो लीवर की नकली दवाइयां बना रहा था। सोनीपत में यह नकली दवाइयां बनाई जा रही थी और फिर मेरठ में इन्हे पैक करके बाजार में उतारने की तैयारी थी। पुलिस ने 50 हजार से अधिक यूनिट जब्त की हैं। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गैंग का नेटवर्क कहां तक फैला है।

बड़ी मात्रा में मिली Fake medicines

पुलिस उपायुक्त ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके कब्जे से LIV-52 की 50 हजार टेबलेट के अलावा 500 रेपर शीट,1200 प्लास्टिक की बोतल और एक वैगन आर कार बरामद हुई है। पकड़े गए आरोपियों ने अपने नाम मयंक अग्रवाल पुत्र सतीश निवासी मोदीनगर, अनूप गर्ग पुत्र घनश्याम निवासी दिल्ली, तुषार ठाकुर पुत्र ओमदेव निवासी गाजिबाद, आकाश ठाकुर निवासी गाजियाबाद और नितिन त्यागी पुत्र राजेश्वर त्यागी निवासी निवाड़ी को गिरफ्तार किया है। इनका एक साथी फरार है। पुलिस अब फरार साथी की की भी तलाश कर रही है। इसके साथ ही जहां-जहां से ये लोग कच्चा माल लेते थे उनकी भी तलाश की जा रही है।

सोनीपत की एक लैब से बनवा रहे थे Fake medicines

पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि, सारी दवाइयां सोनीपत की लेबोरेट्री से बनवाते थे। रेपर और बोतलें मेरठ में स्थित एक शकील पुत्र अब्दुल से बनवाते थे। तैयार माल को जोनी और फरमान के माध्यम से बाजार में बिकवाते थे। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इनका माल कहां-कहां तक जाता था और अब तक बाजार में कितना नकली माल यानी दवाइयां बेच चुके हैं। हैरान कर देने वाली बात यह है कि ये दवाइयां लिवर से जुड़ी हुई थी। ये लोग वह सभी दवाइयां बना रहे थे जिन्हे लोग लीवर की बीमारी को ठीक करने के लिए इस्तेमाल करते थे। इनकी दवाइयों से खराब लीवर को कितना नुकसान होता होगा इसकी भी जांच की जा रही है।

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