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VIP कल्चर पर प्रहार: सरकारी अधिकारियों की गाड़ियों को अब देना होगा टोल टैक्स, केंद्र सरकार बदलने जा रही है नियम

Government Officials Toll Tax: केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए टोल टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। पहले चरण में सरकारी अधिकारियों की गाड़ियों से टोल छूट का अधिकार छीना जा सकता है।

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Government officials vehicles pay toll tax central going change rules

AI से बना प्रतीकात्मक फोटो

National Highway Toll Exemption Rules India: नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले सरकारी अधिकारियों को टोल टैक्स में छूट मिलने वाली नियम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दरअसल, केंद्र सरकार टोल टैक्स छूट के नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है। इस प्रस्तावित बदलाव के पहले चरण में ही केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलने वाली टोल टैक्स की छूट को खत्म किया जा सकता है।

'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने 'राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों' में संशोधन की सिफारिश की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य टोल शुल्क देने से छूट प्राप्त वाहनों की श्रेणियों को धीरे-धीरे कम करना और अंततः उन्हें पूरी तरह समाप्त करना है।

पहले चरण में अधिकारियों की गाड़ियों से हटेगा 'VIP' टैग

समिति ने टोल ढांचे के तहत मौजूदा छूट प्राप्त श्रेणियों को हटाने का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान में इस सिफारिश पर विभिन्न हितधारकों के साथ गहन चर्चा चल रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इन बदलावों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें सरकारी अधिकारियों से जुड़े वाहनों को इस छूट सूची से सबसे पहले बाहर किया जाएगा।

VIP कल्चर को खत्म करने की बड़ी कवायद

इस विचार-विमर्श में शामिल अधिकारियों का कहना है कि यह प्रस्ताव समाज से 'वीआईपी संस्कृति' (VIP Culture) की धारणा को खत्म करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि टोल भुगतान में अधिक एकरूपता और समानता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। नीति निर्माताओं का मानना है कि सरकारी अधिकारियों के लिए विशेष टोल छूट को आम जनता अक्सर अच्छी नजर से नहीं देखती है। ऐसे विशेषाधिकारों को समाप्त करने से यह कड़ा संदेश जाएगा कि टोल प्रणाली के तहत सड़क का उपयोग करने वाले सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

FASTag एनुअल पास का उपयोग करने की सलाह

इस बीच, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने विभिन्न सरकारी विभागों और राज्य प्रशासनों को पत्र लिखकर आधिकारिक वाहनों के लिए टोल छूट मांगने के बजाय 'फास्टैग एनुअल पास' का विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित किया है। अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि विभाग अपने कर्मचारियों के लिए वार्षिक पास खरीदने के बाद रीइंबर्समेंट (पैसा वापस करने) की व्यवस्था कर सकते हैं, जैसा कि अन्य आधिकारिक खर्चों के लिए पहले से किया जाता है। इसके अलावा रक्षा अधिकारियों के साथ भी इस प्रस्ताव पर चर्चा जारी है।

फिलहाल किसे मिलती है टोल से छूट?

मौजूदा नियमों के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 25 निर्धारित सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को ले जाने वाले या उनके साथ चलने वाले वाहनों को टोल टैक्स से छूट मिलती है। इसके अलावा कुछ अन्य श्रेणियों को भी यह छूट प्राप्त है, जिनमें शामिल हैं:-

  • रक्षा उद्देश्यों और केंद्रीय/राज्य सशस्त्र बलों के वाहन।
  • वर्दी में तैनात अर्धसैनिक बलों और आधिकारिक ड्यूटी पर मौजूद कार्यकारी मजिस्ट्रेटों के वाहन।
  • फायर ब्रिगेड (अग्निशमन विभाग) की गाड़ियां।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के निरीक्षण में शामिल वाहन।
  • आपातकालीन सेवाएं जैसे एम्बुलेंस और शव वाहन।

नोट: हालांकि इन छूट प्राप्त वाहनों को टोल शुल्क नहीं देना पड़ता, फिर भी इनके लिए 'Exempted FASTag' लगाना अनिवार्य है, जिसे एनएचएआई (NHAI) की कंपनी आईएचएमसीएल (IHMCL) द्वारा जारी किया जाता है।

क्या है 'एनुअल पास' का विकल्प?

अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में पेश किया गया 3,075 रुपए की कीमत वाला 'फास्टैग एनुअल पास' एक बेहतर विकल्प है। इस पास के जरिए एक वाहन साल में 200 बार टोल प्लाजा पार कर सकता है, जिससे प्रति क्रॉसिंग का औसत खर्च महज 15 रुपये से कुछ अधिक आता है। जरूरत पड़ने पर इस पास को साल में कई बार रिन्यू भी कराया जा सकता है। सरकारी कर्मचारी इसे ऑनलाइन खरीदकर अपने विभाग से क्लेम कर सकते हैं।

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