
नई दिल्ली। आज शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य कका दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। भारी हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इसे स्वीकार कर लिया। बता दें, तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव पर कांग्रे, सीपीएम, एनसीपी और आरएसपी ने सहमति जाताई है। यह पहली बार है जब मोदी सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।
उधर संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा है कि हम विपक्ष के इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा- 'इस प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए वक्त और दिन आज होने वाली बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठम में तय कर लिया जाएगा।'
क्यों लाया गया अविश्वास प्रस्ताव
भाजपा की पूर्व में सहयोगी रही टीडीपी ने संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात कही थी। पार्टी का कहना था कि वे अपनी मांगों को लेकर झुकेगी नहीं। निश्चित रूप से अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। एक दिन पहले ही टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा था- भाजपा नीत एनडीए सरकार के जिदी रवैये के कारण आगामी मानसून सत्र में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया गया है।'
यही नहीं, प्रस्ताव के समर्थन के लिए टीडीपी के सांसदों ने विपक्षी दलों से अपील की थी। साथ ही उन्होंने बीजेपी की सहयोगी शिवसेना से भी प्रस्ताव के समर्थन के लिए मुलाकात की थी। गौर हो, इससे पहले बजट सत्र भी आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने समेत कुछ अन्य मुद्दों के कारण हंगामे की भेंट चढ़ गया था। आज भी मानसून सत्र की शुरुआत में ही विपक्षी पार्टियों ने मॉब लिंचिंग और विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया गया, जिसे दोपहर होते-होते लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने स्वीकार कर लिया।
Published on:
18 Jul 2018, 1:52 PM IST
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