
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)
Supreme Court: गुरुग्राम में तीन साल की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशीलता दिखाते हुए SIT को खास निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि जांच टीम पुलिस की वर्दी के बजाय सादे कपड़ों में बच्ची के घर जाए और एक मनोचिकित्सक की मौजूदगी में उसका बयान दर्ज करें, जिससे की बच्ची के मन में डर न पैदा हो। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने महिला सदस्यों वाली विशेष जांच टीम एसआइटी को जांच पूरी करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत पर भी कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि जब तक SIT अपनी चार्जशीट दाखिल नहीं कर देती। तब तक आरोपियों की जमानत अर्जी पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। साथ ही CJI ने आदेश दिया कि SIT के अधिकारी अपने साथ चाइल्ड काउंसलर्स को भी लेकर जाएं ताकि बच्ची को मानसिक सहयोग मिल सके।
बच्ची पर कोई मनोवैज्ञानिक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। माता-पिता के साथ चाय पिएं और बच्चे से बातचीत करें। एसआइटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीनों आरोपितों की पालीग्राफ जांच रिपोर्ट लगभग एक सप्ताह में आने की उम्मीद है और उन्हें बच्ची से बातचीत करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि गुरुग्राम पुलिस ने पहले पहचान परेड की मांग की थी। लेकिन अब वह इसकी मांग नहीं कर रही है।
मामले की सुनवाई के दौरान, पीड़ित बच्ची की मेडिकल जांच करने वाली महिला डॉक्टर का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और अधिवक्ता सुमीर सोढ़ी ने कोर्ट के समक्ष दलील दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी मुवक्किल 80 वर्षीय एक अत्यंत प्रतिष्ठित और अनुभवी चिकित्सक हैं। जिनका करियर बेदाग रहा है। वकीलों ने स्पष्ट किया कि डॉक्टर ने जांच के दौरान किसी भी स्तर पर अपना बयान नहीं बदला है और वे अपनी बात पर अडिग हैं। इसके साथ ही उन्होंने डॉक्टर की उम्र और उनकी सत्यनिष्ठा का हवाला देते हुए उनके विरुद्ध शुरू की गई समस्त कानूनी कार्यवाही को तत्काल प्रभाव से रद करने की मांग की। हालांकि, पीठ ने कहा, हम फिलहाल किसी के भी खिलाफ कार्यवाही रद नहीं करने जा रहे हैं और यह मामला पूरे देश में एक मिसाल के तौर पर याद रखा जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।
Published on:
07 Apr 2026 12:57 pm
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