
Harish Rana: हॉस्पिटल की सफेद दीवारों के पीछे जहां जिंदगी और मौत के बीच जंग चल रही थी, वहीं बाहर मां की ममता अपनी अंतिम उम्मीदें थामे खड़ी थी। हाथों में हनुमान चालीसा और आंखों में आंसुओं का सैलाब लिए हरीश राणा की मां सिर्फ एक चमत्कार की प्रार्थना कर रही थीं। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। यह कहानी है उस बेबस ममता की, जिसने अपने बेटे को आखिरी पलों में बचाने के लिए अपनी पूरी श्रद्धा लगा दी।
गाजियाबाद के हरीश राणा के जीवन की डोर अब चिकित्सा विज्ञान, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और एक मां की अटूट प्रार्थनाओं के बीच झूल रही है। दिल्ली के AIIMS अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेष टीम कोर्ट के आदेशानुसार हरीश को 'पैसिव यूथेनेशिया या गरिमामय विदाई देने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा कर रही है।
दिल्ली स्थित एम्स के आईआरसीएच IRCH पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती गाजियाबाद के हरीश राणा की स्थिति पर डॉक्टरों की टीम पिछले एक हफ्ते से निरंतर नजर बनाए हुए है। चिकित्सा सूत्रों के अनुसार, इस समय मुख्य प्राथमिकता उन्हें शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव से मुक्त रखना है, जिसके लिए विशेषज्ञों की देखरेख में विशेष दवाएं दी जा रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल उन्हें कुछ दिन और अस्पताल में निगरानी में रखा जा सकता है। वह पिछले एक सप्ताह से बिना खाना और पानी के जीवित हैं। छह दिनों से चल रही इस प्रक्रिया के दौरान हरीश के माता-पिता अभी भी किसी चमत्कार का इंतजार कर रहे है।
उनकी मां अस्पताल के गलियारे में बैठकर हाथ में हनुमान चालीसा लिए चमत्कार का इंतजार कर रही हैं। उनका कहना है कि मेरा बेटा सांस ले रहा है, उसकी धड़कन चल रही है, वह मुझे छोड़कर जा रहा है। पिता की आंखों के आंसू सूख चुके हैं और वह भारी मन से बेटे की सम्मानजनक मौत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। डॉक्टर से बोल रहे हैं कि आखिरी पल में मेरे बेटे को दर्द नहीं होना चाहिए। इस बीच, अस्पताल की मेडिकल टीम हरीश राणा के माता-पिता की काउंसलिंग भी कर रही है, ताकि वे इस कठिन समय में मानसिक रूप से मजबूत रह सकें। जानकारी के अनुसार हरीश की हालत फिलहाल स्थिर है, सूत्र बताते है कि वह ठीक है।
हालांकि, एम्स ने इस पूरे मामले में कोई भी आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की है। एम्स से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ही काम कर रहे है। एम्स के पूर्व निदेशक और सीताराम भारतीय इंस्टीट्यूट के कंसलटेंट डॉ. एमसी मिश्रा ने बताया कि ऐसे मामलों में हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जाता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन कर कोर्ट को रिपोर्ट देते हैं और उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होती है।
Published on:
23 Mar 2026 03:03 pm
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