
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति और सभापति जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष के बहिष्कार करने के निर्णय को अत्यंत पीड़ादायक और अमर्यादित आचरण बताया। उन्होंने कहा कि आज वो सदन छोड़कर नहीं गए, मर्यादा छोड़कर गए हैं। आज उन्होंने मुझे पीठ नहीं दिखाई है, भारत के संविधान को पीठ दिखाई है।
सभापति ने कहा कि मैंने अनुरोध किया कि प्रतिपक्ष के नेता को बेरोकटोक बोलने के अवसर दिया। लेकिन, उन्होंने आज मेरा और आपका अनादर नहीं किया है, उस शपथ का अनादर किया है जो उन्होंने संविधान के तहत ली है। भारत के संविधान की इससे बड़ी अपमान की बात नहीं हो सकती। ऐसा कैसे हो सकता है?
धनखड़ ने कहा कि आज देश के 140 करोड़ लोग आहत होंगे। सदन का मतलब है सत्ता पक्ष की बात सुनो जब आपने अपनी बात कह दी। भारत के संविधान का इतना बड़ा अपमान, इतना बड़ा मजाक नहीं हो सकता। भारत का संविधान हाथ में रखने की किताब नहीं है, जीने की किताब है।
Updated on:
03 Jul 2024 04:59 pm
Published on:
03 Jul 2024 04:58 pm
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